
हिमाचल में 79 वे स्वतंत्र दिवस को एक तरफ बड़े हर्षोलास से मनाया गया दूसरी तरफ प्राकृतिक आपदा से मिले जख्म भी मन को विचलित करते रहे ।
इस ऐतिहासिक अवसर को मनाने के लिए राज्य, जिला और उप-मंडल स्तर पर समारोह आयोजित किए गए। समारोह के मुख्य आकर्षणों में राष्ट्रीय ध्वज फहराना और राज्य पुलिस, होमगार्ड, एनसीसी और आईटीबीपी की टुकड़ियों द्वारा प्रस्तुत आकर्षक मार्च पास्ट शामिल थे।
‘राज्य को अभी तक केंद्र से कोई वित्तीय सहायता नहीं मिली’
अपने संबोधन में, मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश पर ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त की और कहा कि लगातार आने वाली आपदाओं से राज्य में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। 2023 की आपदा का उल्लेख करते हुए, जिसमें राज्य को 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था, उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के अपने आकलन के बावजूद, हिमाचल को केवल 1,500 करोड़ रुपये मिले, वह भी दो साल बाद। उन्होंने कहा कि इस वर्ष की आपदाओं ने एक बार फिर भारी नुकसान पहुंचाया है, खासकर मंडी जिले में, और राज्य को अभी तक केंद्र से कोई वित्तीय सहायता नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए अपने संसाधनों से पहले ही 360.42 करोड़ रुपये वितरित कर चुकी है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि केंद्र जल्द ही आपदा प्रभावित परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करेगा।
आपदा प्रभावित परिवारों को 100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि
मुख्यमंत्री सुक्खू ने आपदा प्रभावित परिवारों को त्वरित राहत प्रदान करने के लिए 100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि जारी करने की घोषणा की। साथ ही, प्रभावित क्षेत्रों में आपदा न्यूनीकरण और आजीविका की सुरक्षा के उद्देश्य से 3,000 करोड़ रुपये की परियोजना का शुभारम्भ भी किया। इस वर्ष की आपदाओं में जान गंवाने वाले 222 लोगों और सरकाघाट विधानसभा क्षेत्र के मसेरन बस दुर्घटना के आठ पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए, उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार प्रत्येक प्रभावित परिवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। उन्होंने कहा कि विशेष राहत पैकेज के अंतर्गत, पूरी तरह से क्षतिग्रस्त घरों के लिए मुआवज़ा 1.3 लाख रुपये से बढ़ाकर 7 लाख रुपये कर दिया गया है, जबकि आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त घरों के लिए इसे 12,500 रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि रहने लायक नहीं रह गए घरों को भी मुआवजे के लिए पूरी तरह से क्षतिग्रस्त माना जाएगा।
युवाओं को चिट्टे से बचाने के लिए गंभीर प्रयास जारी
मुख्यमंत्री ने चिट्टा (हीरोइन) की समस्या पर चिंता व्यक्त की और कहा कि वर्तमान राज्य सरकार युवाओं को चिट्टे से बचाने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पीआईटी एनडीपीएस अधिनियम लागू किया है और नशा माफियाओं की 42 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की है। राज्य सरकार ने पुलिस भर्ती में चिट्टा परीक्षण अनिवार्य कर दिया है। उन्होंने चिट्टा विरोधी स्वयंसेवक योजना शुरू करने की भी घोषणा की, जिसके तहत स्वयंसेवकों को पुलिस और आम जनता के बीच सेतु का काम करने के लिए तैयार किया जाएगा। ये युवा स्वयंसेवक न केवल चिट्टे के प्रसार को रोकने में मदद करेंगे, बल्कि जागरूकता अभियानों और पुलिस को समय पर गोपनीय जानकारी उपलब्ध कराने में भी मदद करेंगे, ताकि नशा माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि इन स्वयंसेवकों के लिए प्रोत्साहन राशि का भी प्रावधान किया जाएगा।
नशा मुक्ति रोकथाम और पुनर्वास बोर्ड के गठन की घोषणा
मुख्यमंत्री सुक्खू ने नशा मुक्ति रोकथाम और पुनर्वास बोर्ड के गठन की भी घोषणा की, जिसमें गृह, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, शिक्षा, युवा सेवा एवं खेल, पंचायती राज और कारागार विभागों के विशेषज्ञों के साथ-साथ गैर सरकारी संगठन और सामाजिक वैज्ञानिक भी शामिल होंगे। यह बोर्ड नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने और नशे की गिरफ्त में फंसे युवाओं को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने के लिए काम करेगा। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही, राज्य सरकार नशे के जाल में फंसे युवाओं के कल्याण के लिए नशामुक्ति और पुनर्वास सुनिश्चित करेगी। इसके लिए नीति आयोग, एम्स, पीजीआई और स्वास्थ्य विभाग मिलकर कार्य योजना तैयार करेंगे।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने आगे कहा कि चिट्टे को जड़ से खत्म करने के लिए, मैंने गांवों और पंचायतों में नशा विरोधी समितियों के गठन के निर्देश दिए हैं, जिनमें पंचायत सचिव, आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और एक पुलिस कांस्टेबल शामिल होंगे। पुलिस नशे से संबंधित जानकारी एकत्र करेगी और उसे समिति के साथ साझा करेगी। पुलिस अधीक्षक और थाना प्रभारी यह सुनिश्चित करेंगे कि पंचायत स्तर पर कांस्टेबलों की नियुक्ति हो, बैठकें नियमित रूप से हों और मासिक रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजी जाए। मुझे उम्मीद है कि इस काम में कोई देरी नहीं होगी, क्योंकि नशे के खिलाफ समय पर कार्रवाई ही इस लड़ाई को जीतने की कुंजी है।
200 सीबीएसई पाठ्यक्रम आधारित स्कूल खोलने की घोषणा
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में सुधार लागू किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप हिमाचल प्रदेश छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के मामले में देश में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने घोषणा की कि सभी सरकारी शिक्षण संस्थानों के शिक्षक अब शैक्षणिक सत्र के बीच में नहीं, बल्कि सत्र के अंत में सेवानिवृत्त होंगे, जिनमें स्कूल, कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, आईटीआई, पॉलिटेक्निक कॉलेज, आयुर्वेदिक कॉलेज और नर्सिंग कॉलेज के शिक्षक शामिल हैं। इसके अलावा, उन्होंने राज्य में 200 सीबीएसई पाठ्यक्रम आधारित स्कूल खोलने की भी घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार प्रदान करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। पिछले ढाई वर्षों के दौरान अकेले सरकारी क्षेत्र में 23,191 युवाओं को नौकरियां दी गई हैं। इनमें से शिक्षकों के 5,452 पद भरे जा चुके हैं, जिनमें 1,788 जेबीटी, 759 व्यावसायिक शिक्षक, 650 पीजीटी, 599 टीजीटी (कला), 405 टीजीटी (नॉन-मेडिकल), 410 टीजीटी (मेडिकल), 205 शास्त्री, 175 भाषा अध्यापक और 458 ड्राइंग अध्यापक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में शिक्षा विभाग में 9,535 और शिक्षकों के पद भरे जाएंगे। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र में 51,425 युवाओं को नौकरियां मिली हैं और अगले महीने पुलिस बल में 1,300 से ज्यादा लोगों की भर्ती की जाएगी। इसके अलावा, पटवारी के 600 पद, जेबीटी के 600 पद, डॉक्टरों के 200 पद और पंचायत सचिव के 300 पद भी भरे जाएंगे।
‘भाजपा सरकार के कार्यकाल बेची जाती थी नौकरियां’
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि चाहे नौकरी की बात हो या निर्णय लेने की, हमारी सरकार पारदर्शिता में विश्वास रखती है। पिछले ढाई वर्षों में हमने हर स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि मेहनती युवाओं को उनकी मेहनत का फल मिलना चाहिए। वर्तमान सरकार ने हिमाचल प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड को भंग कर दिया, क्योंकि पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में बोर्ड में नौकरियां बेची जाती थीं। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने एक सख्त फैसला लेते हुए भ्रष्टाचार के इस अड्डे को खत्म कर दिया है। उन्होंने कहा कि इसके स्थान पर राज्य सरकार ने राज्य चयन आयोग की स्थापना की है, जो पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षा आयोजित करेगा।
नकल रोकने में मदद करने वालों को तीन साल की कैद
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि सरकार ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने और योग्यता आधारित चयन को बढ़ावा देने के लिए एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि पहले हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं में केवल साक्षात्कार के अंकों के आधार पर नौकरियां दी जाती थीं, जबकि लिखित परीक्षा के अंक केवल अर्हक होते थे और उन्हें अंतिम मेरिट में नहीं जोड़ा जाता था। हमने निर्णय लिया है कि अब अंतिम मेरिट में लिखित परीक्षा और साक्षात्कार, दोनों के अंक शामिल होंगे, ताकि सच्चे परिश्रमी उम्मीदवारों को नौकरी मिल सके। सरकार परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए भी गंभीर है। उन्होंने कहा कि हमने परीक्षाओं में नकल करने या दूसरों को नकल करने में मदद करने वालों के लिए तीन साल की कैद का प्रावधान करने का निर्णय लिया है और इसके लिए सरकार अगले विधानसभा सत्र में एक विधेयक लाएगी।
सौर परियोजनाओं से उत्पन्न बिजली खरीदेगा बिजली बोर्ड
सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश को देश का पहला हरित ऊर्जा राज्य बनाने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जनजातीय क्षेत्रों में 100 किलोवाट से लेकर एक मेगावाट तक की सौर परियोजनाओं के लिए पांच प्रतिशत ब्याज अनुदान का प्रावधान किया है, जबकि गैर-जनजातीय क्षेत्रों में ऐसी परियोजनाओं के लिए चार प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जा रहा है। इन परियोजनाओं से उत्पन्न बिजली हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड द्वारा खरीदी जाएगी, जिससे युवाओं को निश्चित आय प्राप्त होगी। उन्होंने इस योजना के लिए 61 करोड़ रुपये की घोषणा की और यह भी घोषणा की कि बेरोज़गार युवाओं को ई-थ्री-व्हीलर के 2,000 परमिट जारी किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई निर्णय लिए हैं। सरकार गाय का दूध 51 रुपये प्रति लीटर और भैंस का दूध 61 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीद रही है। प्राकृतिक रूप से उगाई गई मक्की 40 रुपये प्रति किलो, गेहूं 60 रुपये प्रति किलो, कच्ची हल्दी 90 रुपये प्रति किलो और जौ 60 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदी जा रही है। उन्होंने कहा कि अपनी गारंटी को पूरा करते हुए सरकार ने पशुपालकों से 300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गोबर की खाद भी खरीदना शुरू कर दिया है। बागवानों की समृद्धि के लिए भी राज्य सरकार ने कई कदम उठाए हैं। यूनिवर्सल कार्टन योजना शुरू की गई है तथा एमआईएस योजना के तहत सेब 12 रुपये प्रति किलोग्राम, किन्नू, माल्टा और संतरे 12 रुपये, गलगल 10 रुपये तथा आम 12 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदे जा रहे हैं।
2,96,279 महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह
उन्होंने कहा कि वनीकरण में जनभागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार ने 100 करोड़ रुपये की लागत से राजीव गांधी वन संवर्धन योजना शुरू की है, जिसमें महिला समूहों और युवा क्लबों को शामिल किया गया है। महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 18 से 59 वर्ष की आयु की पात्र महिलाओं के लिए इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख-सम्मान निधि योजना शुरू की है, जिसके अंतर्गत 2,96,279 महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह प्रदान किए जा रहे हैं।
‘चमियाना अस्पताल में रोबोटिक सर्जरी शुरू’
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिमला जिले के चमियाना अस्पताल में रोबोटिक सर्जरी शुरू की गई है और जल्द ही इसे अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी शुरू किया जाएगा। उन्होंने अटल आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान विश्वविद्यालय को नेरचौक से सरकाघाट स्थानांतरित करने की भी घोषणा की। उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार ने सीमा पर्यटन शुरू किया है, जिसके अंतर्गत देश और राज्य के पर्यटक अब चीन सीमा से लगे क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने केंद्र सरकार से शिपकी ला के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू करने का अनुरोध किया है।
सरकाघाट में नए बस अड्डे के निर्माण
शिमला जिले के जुब्बल निवासी फ्लाइट लेफ्टिनेंट अर्शवीर ठाकुर को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उनके पराक्रम के लिए वीर चक्र से सम्मानित किए जाने पर बधाई देते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी बहादुरी ने पूरे हिमाचल प्रदेश को गौरवान्वित किया है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के दौरान, अर्शवीर ने पाकिस्तान के बहावलपुर और मुरीदके में आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश ‘वीरभूमि’ है और देश का पहला परमवीर चक्र भी हिमाचल के मेजर सोमनाथ शर्मा को ही प्रदान किया गया था। स्वतंत्रता दिवस पर, उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वालों को याद किया। मुख्यमंत्री ने सरकाघाट में नए बस अड्डे के निर्माण, नागरिक अस्पताल सरकाघाट की बिस्तर क्षमता 100 से बढ़ाकर 150 करने और शिव मंदिर सरकाघाट के पास पार्किंग के लिए भूमि उपलब्ध कराने की घोषणा की।
विभिन्न सांस्कृतिक दलों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए। इस अवसर पर गृह रक्षकों ने जीवन रक्षा तकनीकों का प्रदर्शन भी किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर परेड और सांस्कृतिक दलों के प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया। सरकाघाट के जगन्नाथ ने मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए एक लाख रुपये का चेक भी मुख्यमंत्री को भेंट किया।
विधायक चंद्रशेखर, सुरेश कुमार, रणजीत राणा, दलीप ठाकुर, पूर्व मंत्री रंगीला राम राव और प्रकाश चौधरी, पूर्व मुख्य संसदीय सचिव सोहन लाल ठाकुर, कांगड़ा सहकारी प्राथमिक कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष राम चंद्र पठानिया, एपीएमसी मंडी के अध्यक्ष संजीव गुलेरिया, हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के संयोजक अतुल करोहटा, हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग के सदस्य विजय पाल सिंह, कांग्रेस नेता पवन ठाकुर, नरेश चौहान, जीवन ठाकुर और चंपा ठाकुर, मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी, अन्य वरिष्ठ अधिकारी और कांग्रेस नेता भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
