हिमाचल में दवाओं के सैंपल फेल हुए तो मालिक के खिलाफ आपराधिक मामला किया जाएगा दर्ज, अधिसूचना जारी

 शिमला
सांकेतिक तस्वीर
हिमाचल के सिरमौर में कालाअंब स्थित मैसर्ज डिजिटल विजन दवा कंपनी के सुर्खियों में आने और दो साल के भीतर 200 से ज्यादा दवाइयों के सैंपल फेल होने के बाद राज्य सरकार ने शिकंजा कस दिया है। अधिसूचना जारी कर सरकार ने कहा है कि दवाओं के सैंपल बार-बार फेल हुए तो अब कंपनी का लाइसेंस रद्द कर मालिक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा।

वर्तमान में प्रदेश भर में करीब 750 फार्मा उद्योग स्थापित हैं। दवाओं की गुणवत्ता मानकों के अनुकूल न होने पर सात दिनों के भीतर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की जाएगी। यही नहीं, अधिकारियों को साल में कम से कम एक बार रूटीन निरीक्षण करना होगा। इसकी रिपोर्ट 10 दिनों के भीतर सरकार को देनी होगी।

निरीक्षण के दौरान लिए गए सैंपल की जांच भी 10 दिनों में करनी होगी। दवाओं के सैंपल की जांच के बाद तीन तरह (कैटेगिरी ऑफेंस) की श्रेणियों को तय किया गया है। इसमें ए वर्ग में 7 दिन, बी वर्ग में 15 दिन और सी वर्ग में 21 दिन के भीतर आगामी कार्रवाई करनी होगी। इसके बाद दवाओं की जांच यदि आगे बढ़ती है, तो 90 दिनों के भीतर रिपोर्ट देनी होगी।

वर्ष 2018 : हिमाचल की 100 से अधिक दवाओं के सैंपल फेल

उल्लेखनीय है कि सरकार पहले ही दवाओं के सैंपल फेल होने के कारण सरकारी दवा खरीद प्रक्रिया से तीन दवा कंपनियों को ब्लैक लिस्ट कर चुकी है। इस महीने सरकारी स्तर पर की जा रही दवा खरीद के लिए जो नया रेट कांट्रेक्ट किया जा रहा है, उसमें ब्लैक लिस्ट कंपनियां हिस्सा नहीं ले पाएंगी।

अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य आरडी धीमान ने कहा कि नियमों में सख्ती की गई है। इससे दवा कंपनियों पर कंट्रोल रहेगा। ड्रग इंस्पेक्टरों की भी समय-समय पर छानबीन किए जाने के लिए जिम्मेदारियां तय की गई हैं।

वर्ष 2018 : हिमाचल की 100 से अधिक दवाओं के सैंपल फेल
वर्ष 2019 : प्रदेश में बनीं 100 दवाएं मानकों पर खरी नहीं उतरीं
वर्ष 2020 : जनवरी माह में सूबे के उद्योगों की चार दवाएं फेल हुई हैं

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