
चंबा। जिले की सड़कों में हुई वाहन दुर्घटनाओं में अब तक सैकड़ों लोग अपनी जान गवां चुके हैं। हर साल ही कहीं न कहीं बड़ी वाहन दुर्घटना जिला में घटी है। रविवार की रात भी बड़ग्रां में वाहन दुर्घटना में 12 युवाआें की मौत हो गई। इससे पहले धुलाड़ा में हुआ बस हादसा अब तक की बड़ी दुर्घटना रही है। इसमें एक साथ 52 लोग मौत का ग्रास बने थे। इसके अलावा इसमें 46 लोग घायल हुए थे। इससे पहले भी जिले में वाहन दुर्घटनाएं होती रही हैं। वर्ष 1999 में चकोली पुल पर ट्रक दुर्घटना में 44 लोग मारे गए थे। वर्ष 2000 में भी निगम की बस लाहल के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इसमें 8 लोग मारे गए थे। वर्ष 2001 में गरोला में निजी बस दुर्घटनाग्रस्त होने से 18 लोग मरे थे। उसके बाद इसी वर्ष कल्हेल में निजी बस दुर्घटनाग्रस्त हुई। इसमें 32 लोग मारे गए और 4 लोग घायल हुए थे। उसके बाद वर्ष 2004 में निगम की बस गैहरा में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, इसमें 2 लोग मारे गए थे जबकि 12 लोग बुरी तरह से घायल हो गए। वर्ष 2009 में कठवाड़ में निजी बस दुर्घटनाग्रस्त हुई।
इसमें बस में सवार 23 लोग मौके पर ही मारे गए थे। वर्ष 2009 में भरमौर में बोलेरो दुर्घटनाग्रस्त हुई, इसमें 6 लोग मारे गए थे। वर्ष 2009 में सलूणी में निजी बस दुर्घटनाग्रस्त हुई। इसमें 24 लोगों की मौत हुई व 36 लोग घायल हुए थे। वर्ष 2010 में करीयां में जीप दुर्घटना में 11 लोग मर गए थे, जबकि 3 लोग घायल हो गए थे। वर्ष 2011 में सुंडला में मारुति कार दुर्घटनाग्रस्त हुई। इसमें 1 की मौत हुई थी। वर्ष 2011 में ही चनेड़ में कार दुर्घटना में दो लोग मरे गए थे। इसी साल जम्मुहार मार्ग पर कार दुर्घटनाग्रस्त हुई इसमें 2 की मौके पर मौत हो गई। परिहार में मारुति कार दुर्घटनाग्रस्त होने से एक की मौत हुई थी। शेरपुर में टेंपो दुर्घटनाग्रस्त होने से 34 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि आठ घायल हुए थे। इसी वर्ष कूड़था में निजी बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, इसमें दो लोगों की मौत हो गई। भरमौर में बोलेरो दुर्घटनाग्रस्त होने से एक की मौत और कोटी में निजी बस दुर्घटनाग्रस्त होने से 10 लोगों की मौके पर मौत हो गई थी। बाहरी राज्यों से मणिमहेश जा रही श्रद्धालुओं की गाड़ी भी रठियार के पास लुढ़क गई थी। इस वजह से पांच यात्री मौके पर ही मर गए थे। मछैतर के पास जीप गिरने से आधा दर्जन के के करीब जानें गईं थीं। इसी माह पिछले शनिवार को चुवाड़ी की कालीघार में तीन लोगाें की मौत हो चुकी है। यह जगह भी पहले कई जानें ले चुकी है। भी कई लोग बेमौत मारे जा चुके हैं।
