हर साल आपदा में समाते स्कूल भवन

रानीखेत। नगर का एकमात्र राजकीय बालिका इंटर कालेज हर साल आपदा में खतरे की जद में आता जा रहा है। तीन साल पहले नए कक्षों के निर्माण के दौरान हुए भूस्खलन के कारण ध्वस्त पांच कक्षाओं को तो ठीक नहीं किया गया, अब शेष बची हुई कक्षाओं पर भी खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। गत 20 अगस्त को हुई अतिवृष्टि ने विद्यालय प्रशासन की नींद उड़ा दी है। इन हालातों में छात्राओं की जान खतरे में आ चुकी है।
राजकीय बालिका इंटर कालेज की स्थापना 1929 में हुई। 1995 तक यहां लगभग डेढ़ हजार बालिकाएं पढ़ती थीं, राज्य बनने के बाद अध्यापकों के साथ-साथ छात्राओं की संख्या में भी कमी आई। वर्तमान में यहां लगभग आठ सौ छात्राएं अध्ययनरत हैं। दूसरी तरफ विद्यालय में तीन साल पूर्व आपदा की भेंट चढ़े चार पुराने कक्षों को आज तक ठीक नहीं किया गया है। 2008 में विभाग ने यहां छह नए कक्षों को स्वीकृति दी। इसके लिए 59 लाख रुपये स्वीकृत हुए। निर्माण की जिम्मेदारी आरईएस विभाग को सौंपी गई। पहली किस्त के रूप में मिले 36 लाख रुपये से कमरों का निर्माण विद्यालय भवन के ठीक नीचे चल रहा था। लेकिन कटान के दौरान पुराने कमरों की नींव हिल गई, 2010 में आई आपदा के कारण विद्यालय के पांच पुराने कक्ष ध्वस्त हो गए। आरईएस ने तीन कमरे बनाए और निर्माण कार्य रोक दिया। खंड शिक्षा अधिकारी एचआर राजन ने बताया कि पुराने ध्वस्त कमरों को ठीक करने के लिए तहसील प्रशासन आपदा मद के दायरे से बाहर रख रहा है। कई बार विभाग को लिखा गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। कक्षा कक्षों की कमी के चलते बालिकाएं प्रयोगशाला में पठन पाठन कर रही हैं। प्रभारी प्रधानाचार्या शीला मिश्रा ने कहा कि परिसर में लगातार भूस्खलन हो रहा है, जिस कारण कमरों के अंदर पठन पाठन कार्य कराने से डर लग रहा है। आरईएस ने जो भी कमरे बनाए हैं, उनमें तमाम तरह की खामियां हैं। जिन्हें हस्तांतरित नहीं किया जा सकता।
-भूस्खलन वाली जमीन पर नए कक्ष बन रहे थे। कटान के दौरान पूरा मलबा नीचे आ गया। रिटर्निंग वाल और सफाई में 11 लाख रुपये खर्च हो गए। 2011 में विभाग ने दूसरी किस्त के रूप में 23 लाख रुपये दिए। धन की कमी के कारण तीन कमरे ही बने हैं। अब शिक्षा निदेशालय को रिवाइज इस्टीमेट बनाकर भेजा गया है।
-बीएस नेगी, ईई, आरईएस

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