हर रोज जिंदगी दांव पर लगाते हैं लोग

भराड़ी (बिलासपुर)। भराड़ी क्षेत्र के तहत मटयाल और इससे सटे कई गांवों के सैकड़ों लोग हर रोज अपनी जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं। बरसात हो या फिर खिली धूप। नदी पार करने के लिए खड्ड की उफनती लहरों को ग्रामीण रोज चुनौती दे रहे हैं। करीब 12 साल पहले हुए मटयाल पुल के शिलान्यास के बाद एक ईंट तक नहीं लगी। लेठवीं-लजंटावेला सड़क पर मटयाल में यह पुल बनना था।
इस पुल का शिलान्यास सात जून 1999 में तत्कालीन लोनिवि और आबकारी एवं कराधान मंत्री ने किया था। इसके बाद सरकारें बदलती गईं, लेकिन पुल का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। हर साल चुनावी बेला में लोगों से नेता वादे करते रहे, किंतु चुनाव निपटने के बाद किसी ने सुध नहीं ली। इस पुल के बनने से मटयाल, पटेर, लठेर, धारवाड़, तलवाड़ा, जंजता, बेला, भटोली, कुठेड़ा, मोरसिंघी और मसौर समेत कई गांवों को फायदा होगा। पुल नहीं होने के कारण बरसात के दिनों में यहां स्थानीय जनता को गंतव्य तक जाने के लिए जिंदगी दांव पर लगानी पड़ती है। इलाके के लोगों ने यह मामला कई बार सरकार के समक्ष उठाया, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की।
इलाके के काका चौहान, बबलू, शशि पाल, बंसी राम, रूप लाल, राजकुमार, गरजा राम, देव राज ने कहा कि पुल का वह कई सालों से इंतजार कर रहे हैं। बजट होने के कारण पुल नहीं बन रहा। इससे इलाके के लोगों में भारी रोष है। स्थानीय विधायक एवं मुख्य संसदीय सचिव राजेश धर्माणी ने कहते हैं कि उन्होंने लोनिवि को प्राथमिकता के आधार पर इस पुल का कार्य आरंभ करने के निर्देश दिए हें। लोनिवि के अधिशासी अभियंता पीसी वर्मा का कहना है कि पुल के एक छोर पर जमीन के विवाद के कारण काम शुरू नहीं हो पाया। अब पुल की लंबाई को कम करके इसकी डीपीआर बनाकर आला अधिकारियों को भेजी गई है। मंजूरी मिलते ही कार्य आरंभ कर दिया जाएगा।

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