
बरमाणा (बिलासपुर)। कोलबांध विस्थापितों व प्रभावितों ने उनकी मांगों व समस्याआें के प्रति प्रशासन व परियोजना प्रबंधन के रवैये पर गहरा रोष जताया है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि प्रशासन व कोलडैम प्रोजेक्ट का निर्माण कर रही एनटीपीसी को मांगपत्र सौंपने के बावजूद उस ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। आरपार की लड़ाई का ऐलान कर चुके चारों जिलों के विस्थापित 10 फरवरी को हरनोड़ा में बैठक आयोजित कर आंदोलन की रणनीति बनाएंगे।
हरनोड़ा में गत मंगलवार शाम आयोजित बैठक में कहा गया कि लोगों ने कोल बांध परियोजना के लिए अपने मकानों व खेत-खलिहानों का बलिदान दिया है। विस्थापन का दंश सहने के साथ ही उन्हें कई अन्य समस्याओं से भी जूझना पड़ रहा है। प्रदूषण ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आलम यह है कि धूल के कारण जहां घास व पशु चारा खराब हो रहा है, वहीं घरों के भीतर भी धूल का साम्राज्य नजर आता है। इससे लोग कई तरह की बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
बैठक में कहा गया कि देश के विकास के लिए कोलबांध परियोजना का निर्माण बेहद जरूरी है, इसके लिए बड़ी कुरबानी देने वाले विस्थापितों व प्रभावितों के हितों की रक्षा करना प्रशासन व परियोजना प्रबंधन की नैतिक जिम्मेदारी भी है। दुख इस बात का है कि उस ओर से उनकी उपेक्षा की जा रही है। गत 29 जनवरी को सौंपे गए मांगपत्र पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। निर्णय लिया गया कि 10 फरवरी को बिलासपुर, मंडी, सोलन व शिमला जिले के विस्थापित व प्रभावित हरनोड़ा में बैठक आयोजित करके आंदोलन की रणनीति बनाएंगे। बैठक में एडवोकेट बाबूराम, रामलोक, प्रेमलाल, बृजलाल बंसल, बीरबल राम, छोटाराम, प्रकाश चंद, विपिन कुमार व समेत कई अन्य लोगों ने भाग लिया।
