
बिलासपुर। पुलिस प्रशासन की ढील कहें या निडर चालकों की मनमानी। जिले में लापरवाही की हदें पार हो गई है। सामान ढोने के लिए खरीदे गए वाहनों में सवारियां ठूंस-ठूंस कर भरी जा रही है। इस लापरवाही से लोग अपनी जिंदगी तक गंवा रहे हैं। सोमवार को धरोटी के समीप 20-25 सवारियों से भरा टैंपो सड़क पर पलट गया। हादसे में 20 लोग घायल हो गए।
मालवाहक वाहनों में सवारियां ढोई जा रही है तो बाइक सवार तेज रफ्तार के साथ स्टंट करते हुए निकल कर अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। राह चलने वालों की जिंदगी भी दांव पर हैं। नयनादेवी और शाहतलाई में इस माल वाहक वाहनों में सवारियां ढोने के अधिक मामले सामने आते हैं। उस पर पुलिस प्रशासन भी महज चालान काटने तक ही सीमित है। वाहनों के चालान काट राजस्व भरा जा रहा है। बड़ी सख्ती नहीं दिखाई जा रही। लोगों की मानें तो माल वाहक वाहनों में सवारियां उठाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। तभी इस लापरवाही पर अंकुश लग सकता है।
जनपद की विभिन्न सड़कों पर पहली मार्च से अब तक 27 हादसे हो चुके हैं। इनमें छह लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा, जबकि 65 लोग घायल हो गए। अधिकतर मामलों में दुर्घटना की वजह सड़क की खस्ताहालत और चालकों की लापरवाही सामने आई है।
बिलासपुर में हुए सड़क हादसे–
छह अप्रैल–बल्लू में कार बाइक में टक्कर, चार घायल
11 अप्रैल–मैहरी काथला एक की मौत
14 अप्रैल–दो हादसों में 24 लोग घायल
14 अप्रैल–दधोल में बाइक दुर्घटनाग्रस्त, एक मौत
एक मार्च–नयनादेवी में बस बाइक की टक्कर, एक मौत
आठ मार्च–बरमाणा और हरनोड़ा में हादसे, दो की मौत
16 माच–जिले में तीन हादसे, सात लाग जख्मी
21 मार्च कंदरौर में ट्रैक्टर पलटा, एक मौत
30 मार्च-तारकोल के ड्रम से टकराई बस, छह झुलसे
कोड्स–
अधिकतर मामलों में दुर्घटना की वजह सड़क की दुर्दशा और चालकों की लापरवाही सामने आई है। मालवाहक वाहनों में सवारियां उठाने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। भविष्य में इस पर और सख्ती बरती जाएगी।
-भूपेंद्र कंवर, एएसपी बिलासपुर।
