
शिमला। शहर के हजारों परिवारों को दूध के दाम में पानी मिल रहा है। दूध की थैली 17 रुपये में मिल जाती है, जिसका माह भर में 600 से 700 रुपये खर्च बैठता है। लेकिन निगम परिधि से सौ मीटर बाहर के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को तीसरे दिन पानी की सप्लाई के 880 रुपये प्रति माह चुकाने पड़ रहे हैं। नगर निगम एरिया से सौ मीटर के दायरे में आने वाले दो हजार से अधिक उपभोक्ताओं से नगर निगम पानी का मासिक बिल पांच गुना अधिक वसूल रहा है। शहर में पानी का मासिक बिल डेढ़ सौ रुपये है, वहीं सौ मीटर बाहर मासिक बिल 880 रुपये है। छह माह का एक साथ 5280 बिल आने पर उपभोक्ता आक्रोशित हैं। भट्ठाकुफर, लंबीधार, मल्याणा, लोअर समिट्री, मशोबरा, टुटू और खलीनी के कुछ क्षेत्रों सहित न्यू शिमला से सटे रक्षाणा में आईपीएच ने पीने के पानी की लाइन नहीं बिछाई है। ऐसे में नगर निगम इन क्षेत्रों में पानी की सप्लाई मुहैया करवा रहा है। अक्तूबर 2012 में नगर निगम सदन ने स्टाफ की कमी का हवाला देेते हुए मीटर रीडिंग की बजाय मासिक बिल को फ्लैट करने का प्रस्ताव पारित किया। शहर के पच्चीस वार्डों में रहने वाले करीब बीस हजार घरेलू उपभोक्ताओं से डेढ़ सौ रुपये मासिक बिल वसूलने का प्रस्ताव पारित किया गया जबकि सौ मीटर बाहर मासिक बिल 880 रुपये कर दिया। अब अक्तूबर 2012 से मार्च 2013 तक के बिल एक साथ लोगों को भेजे गए हैं। शहर में जहां 1038 रुपये बिल भेजा गया है वहीं एमसी से बाहर 5280 रुपये के बिल भेजे गए हैं। मंगलवार को स्थानीय निवासियों कृष्ण बाली, मनोज कुमार आजटा, मोहन लाल, सुरेश कुमार, सुरेंद्र चौहान और इंद्रा चंदेल समेत कई अन्य लोगों ने निगम अभियंता से इसकी शिकायत की। लेकिन इन्हें निगम सदन में पारित प्रस्ताव का हवाला देते हुए खाली हाथ लौटा दिया गया।
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निगम का पानी हुआ कड़वा
कमलानगर के प्रतिज्ञा भवन निवासी बीआर वर्मा ने कहा कि निगम का पानी तो अब कड़वा लगने लगा है। सौ मीटर बाहर के लोगों से सौतेला व्यवहार हो रहा है।
लोगों पर लादा आर्थिक बोझ
भट्ठाकुफर के चौहान भवन निवासी बस्ती राम ने कहा कि तीसरे दिन सप्लाई देकर लोगों पर आर्थिक बोझ लादा जा रहा है। सुविधाओं के नाम पर क्षेत्र में कोई सुविधा नहीं दी जा रही।
हमसे हो रही नुकसान की भरपाई
मशोबरा के राजपूत लॉज निवासी सुनील कुमार का कहना है कि शहर में जो रेट घटाए गए हैं, उसकी भरपाई सौ मीटर बाहर रहने वाले लोगों से की जा रही है।
कामर्शियल उपभोक्ताओं के रेट भी कम
लंबीधार निवासी देवेंद्र ठाकुर ने कहा कि कामर्शियल उपभोक्ताओं के बिल भी हमसे कई गुना कम आ रहे हैं। इससे तो बेहतर है कि मीटर रीडिंग के आधार पर ही बिल भेजा जाए।
पारित प्रस्ताव का कर रहे पालन : गुप्ता
निगम अभियंता विजय गुप्ता का कहना है कि निगम सदन ने शहर और शहर से बाहर पानी की दरें तय की हैं। प्रशासन तो पारित प्रस्ताव के आधार पर बिल भेज रहा है।
रेट घटाने का प्रस्ताव दोबारा लाएंगे : महापौर
महापौर संजय चौहान ने कहा कि निगम सदन में जब यह प्रस्ताव आया था तो उन्होंने इसका विरोध किया था। लेकिन सदन के अधिकांश सदस्यों के एकमत होने पर रेट बढ़ाने पड़े थे। लोगों पर पड़े आर्थिक बोझ को देखते हुए जल्द ही सदन में दोबारा से रेट कम करने का प्रस्ताव लाया जाएगा।
