हक की लड़ाई लड़ने को मजबूर पूर्व सैनिक

नूरपुर (कांगड़ा)। देश की सरहदों की रक्षा के लिए ताउम्र देने वाले हजारों पूर्व सैनिकों को स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए मीलों लंबा सफर तय करना पड़ रहा है। जबकि, एक्स सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ईसीएचएस) के तहत पूर्व सैनिकों से रिटायरमेंट पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए 20 से 70 हजार रुपये तक अंशदान लिया जाता है। बावजूद इसके ईसीएचएस के तहत नूरपुर उपमंडल के तकरीबन दस हजार सैन्य परिवारों की पॉली क्लीनिक खोलने की चिरलंबित मांग पूरी नहीं हो पाई है। जिसके चलते हजारों सैन्य परिवारों को चिकित्सा सुविधा के लिए 25 से 65 किमी दूर पठानकोट जाना पड़ रहा है। इतना ही नहीं वर्ष 1996 से पूर्व सेवानिवृत्त सैनिकों को ईसीएचएस स्कीम में शामिल करने के बाद 100 रुपये प्रतिमाह मिलने वाला मेडिकल भत्ता भी समाप्त कर दिया गया है। जबकि, पठानकोट स्थित पॉली क्लीनिक में चेकअप या फिर टेस्ट करवाने के लिए पहले नाम दर्ज करवाना पड़ता है और इस सारी कागजी प्रक्रिया में 4 से 5 दिन लग रहे हैं। हालांकि, पूर्व सैनिक लीग पिछले कई साल से इस चिरलंबित मांग को लेकर संघर्ष करती आ रही है। बावजूद इसके ईसीएचएस के किसी भी अधिकारी ने उनकी सुनवाई नहीं की है। इस बाबत पूर्व सैनिक लीग (नूरपुर) के चेयरमैन रिटायर कर्नल एनएस पठानिया, कैप्टन हरि सिंह, कैप्टन पंजाब सिंह, कैप्टन बलदेव चौधरी, कैप्टन जीत शर्मा, कर्नल सुदर्शन पठानिया, कैप्टन सतीश परमार, कर्नल बीबी शर्मा, रिटायर फ्लाइट लेफ्टिनेंट सहदेव सिंह पठानिया का कहना है कि पॉली क्लीनिक की चिरलंबित मांग को लेकर प्रबंधक निदेशक ईसीएचएस और देहली कैंट को कई बार लिखित ज्ञापन भी प्रेषित किए जा चुके हैं, लेकिन पूर्व सैनिकों की न्यायोचित मांग पर आज दिन तक कोई गौर नहीं किया गया।

Related posts