स्वर्ण जयंती बंद, आजीविका मिशन शुरू

नूरपुर (कांगड़ा)। करीब डेढ़ दशक से गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर कर रहे लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के मकसद से चलाई जा रही स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना (एसजीएसवाई) को बंद कर दिया गया है। इसकी जगह अब केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन लेगी।
इस नई योजना को प्रदेश में प्रायोगिक तौर पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में पांच विकास खंडों में ही क्रियान्वित किया जाएगा। इसमें हरोली, बसंतपुर, कंडाघाट, सदर मंडी समेत विकास खंड नूरपुर को शामिल किया गया है। सूत्रों की मानें तो इस राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लोगों की आर्थिकी में सुधार लाना होगा। इसके तहत लोगों को स्वरोजगार अपनाने के लिए सात प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। इसमें 75 प्रतिशत केंद्र और शेष 25 प्रतिशत राज्य सरकार की हिस्सेदारी होगी। इस मिशन में युवाओं को भी स्वरोजगार शुरू करने के लिए अवसर मिलेंगे। इसके लिए पहले प्रदेश सरकार विशेषज्ञ एजेंसी से सर्वे करवाएगी तथा उसके आधार पर स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। नई योजना में खास बात यह है कि इसमें स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लोगों को अपनी मर्जी का व्यवसाय शुरू करने के लिए ऋण उपलब्ध करवाया जाएगा। साथ ही पंचायत स्तर पर बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने के मकसद से इस योजना के तहत कई अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाएं जाएंगे। फिलहाल इस योजना को पहले चरण में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लागू किया जाएगा। अगले चरण में इस योजना को प्रदेश के अन्य विकास खंडों में क्रियान्वित किया जाएगा।
इनसेट
इस मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों को आजाविका कमाने के लिए सात फीसदी ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध करवाया जाएगा। इसके साथ ही युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने को प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। (कुलवीर राणा, कार्यक्रम अधिकारी, डीआरडीए)
इस पायलट प्रोजेक्ट में प्रदेश के पांच विकास खंडों में जिला कांगड़ा के विकास खंड नूरपुर को भी शामिल किया गया है। प्रारंभिरक चरण में इस मिशन को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लागू किया जा रहा है। -सलीम आजम खान, बीडीओ नूरपुर-

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