
नौगांव(उत्तरकाशी)। सर्वाधिक सेब उत्पादित करने वाला स्योरी फल पट्टी अब तक सड़क से नहीं जुड़ सका है। जिससे काश्तकारों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। दस वर्ष पहले स्वीकृत मोटर मार्ग वन भूमि के कारण अधर में है।
सेब उत्पादन के लिए मशहूर स्योरी फल पट्टी में हर वर्ष करीब एक लाख पेटी सेब पैदा होता है। यह सेब बिक्री के लिए लखनऊ, दिल्ली, कानपुर, वाराणसी, सहारनपुर तथा देहरादून की मंडियों तक पहुंचता है। क्षेत्र के बिंग्सी, मटियाली, किम्मी, रस्टाड़ी, कंडाऊ, नैणी, पिसाऊं, नौगांव, धारी, कोटियालगांव, मुंगरा, मुराड़ी, क्वाड़ी सहित डेढ़ दर्जन से ज्यादा गांवों के लोगों की आजीविका सेब उत्पादन पर ही टिकी है।
हैरानी की बात है कि बड़े पैमाने पर सेब उत्पादन तथा ग्रामीणों की मांग के बावजूद अब तक इस फल पट्टी को सड़क से नहीं जोड़ा जा सका है। ऐसे में घोड़े-खच्चरों पर ढोकर लाने से सेब को काफी नुकसान पहुंचता है। काश्तकार फसल मंडियों तक पहुंचाने को लेकर चिंतित हैं। ग्रामीणों की मांग और जरूरत को देखते हुए वर्ष 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवाड़ी ने स्योरी फलपट्टी के लिए दस किमी सड़क स्वीकृत की थी। लेकिन यह सड़क वन कानूनों में उलझ कर रह गई है।
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स्योरी फलपट्टी सड़क से न जुड़ पाने से काश्तकारों को भारी दिक्कतें होती हैं। सड़क बन जाए तो किसानों को अपना सेब मंडियों तक पहुंचाने में सहूलियत होगी। – राकेश शारदा, विजय बधानी, महावीर सिंह, प्रेम सिंह राणा सेब काश्तकार।
सड़क में विभिन्न प्रजाति के करीब 1200 पेड़ आ रहे थे। ज्यादा नुकसान को देखते हुए वन संरक्षक गढ़वाल वृत्त स्तर से इसकी स्वीकृति नहीं मिल पाई।- डीके सिंह, डीएफओ अपर यमुना वन प्रभाग।
विभाग चार बार इस सड़क की फाइल वन विभाग को भेज चुका है। जो हर बार आपत्ति के साथ लौट आती है। अब ग्रामीणों की सहमति पर मटियाली तक छह किमी सड़क की फाइल तैयार कर वन विभाग को भेजी जा रही है।- हरीश कुमार शर्मा, ईई लोनिवि बड़कोट।
