
काजा (लाहौल-स्पीति)। ताजा हिमपात ने किन्नौर के साथ स्पीति घाटी में भी भारी तबाही मचाई है। बर्फ पिघलने के साथ ही तबाही का मंजर सामने आने लगा है। खेतों में नकदी फसलें बिछ चुकी हैं तथा सेब से लदे पेड़ टूटकर तबाह पड़े हैं। स्पीति के कई गांवों में दो दिन पहले दो से ढाई फुट तक बर्फबारी हुई थी। हिमपात से सबसे अधिक नुकसान सेब के पौधों को हुआ है। इसके अलावा सैकड़ों बीघा जमीन पर लगा हरे मटर, जौं और अन्य नकदी फसलें भी ठंड के कारण खेतों में ही सड़ना शुरू हो चुकी हैं। स्पीति के हजारों परिवार सेब बागवानी और कृषि से जुड़े हैं। यही नहीं स्पीति के ताबो में होने वाले सेब की दिल्ली जैसे महानगरों में खासी डिमांड है तथा इनकी कीमती भी काफी रहती है।
घाटी के हुरलिंग, ताबो, लरी और पोह में सेब से लदे के करीब चार हजार पेड़ टूटकर तबाह हो चुके हैं। ग्यू और ताबो पंचायत के करीब आधा दर्जन गांवों में मटर, जौ और गेहूं समेत अन्य नगदी फसल खेतों में ही तबाह हो गई हैं। बर्फबारी के कारण किसानों और बागवानों को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। पूर्व विधायक रघुवीर ठाकुर ने इसको लेकर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर उचित राहत राशि जारी करने की मांग की है। बताया कि बेमौसमी बर्फबारी के कारण स्पीति घाटी के किसान बैकफुट पर आ गए हैं। किसान सुबोध कुमार, राजकुमार, महेंद्र सिंह, विजय कुमार, खेरप्प छोपेल और दोरजे ने बताया कि बीते दिनों हुई बर्फबारी और बारिश ने घाटी के किसानों को बैक फुट पर ला खड़ा कर दिया है। उन्हाेंने बताया कि घाटी से हर साल बागवान और किसान करोड़ाें रुपये सेब और अन्य नगदी फसलों को देश की मंडियों में बेचते आए हैं। इस बार बर्फबारी ने उनकी कमर तोड़ दी है। एसडीएम राहुल चौहान ने कहा कि रेवन्यू टीम को नुकसान का जायजा लेने के निर्देश दिए हैं। टीम ने नुकसान की रिपोर्ट तैयार करना शुरू कर दी है। आकलन कर इसकी रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी।
