
श्रीनगर। आपदा के दो महीने बाद भी जलमगभन हुए आईटीआई, लोअर भक्तियाना, शक्तिविहार क्षेत्रों में जनजीवन सामान्य नहीं हो पाया है। अब भी गलियों में जगह-जगह मलबे के ढेर लगे हैं। निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण कई इलाकों में जल भराव की समस्या पैदा हो गई है। इससे यहां बीमारी फैलने का अंदेशा बढ़ गया है। संवेदनशील क्षेत्र होने के बावजूद यहां स्ट्रीट लाइट तक के इंतजाम नहीं हैं।
आपदा को दो माह गुजर गए लेकिन आपदा प्रभावित क्षेत्रों में स्थितियां ज्यादा सुधरी नहीं हैं। शक्ति विहार के रास्ते साफ नहीं हो पाए हैं और गलियों में मलबा भरा हुआ। इस कारण लोगों को आवाजाही में दिक्कत हो रही हैं। सबसे खराब हालत आईटीआई के पास चौहान मोहल्ले में है। यहां घरों और सड़क से मलबा तो हटा लिया गया है, लेकिन जल भराव की समस्या पैदा हो गई है।
डा. विक्रम सिंह बर्त्वाल के मुताबिक राजमार्ग से मलबा हटाते हुए नालियों और पानी की निकासी का ध्यान नहीं रखा गया। इस कारण जगह-जगह गंदे पानी के तालाब बन गए हैं। पिछले कुछ दिनों से मच्छर बेतहाशा बढ़े हैं। हिमांशु और मनोज रावत ने बताया कि हाल ही में हुई बरसात के बाद स्कबर मलबे से बंद हो चुका है और बारिश का पानी राजमार्ग पर जमा है। स्थानीय निवासियाें ने पानी की निकासी के इंतजाम जल्द करने की मांग की है। साथ ही खस्ताहाल सड़कों और संवेदनशील क्षेत्र को देखते हुए स्ट्रीट लाइट लगवाने की भी मांग की है।
कोट–
राष्ट्रीय राजमार्ग बीआरओ के अधीन है। इसलिए नगर पालिका के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। क्षेत्र में अभी विद्युत व्यवस्था सुचारू नहीं हो पाई है। युद्धस्तर पर काम चल रहा है, जैसे ही विद्युत आपूर्ति सुचारू होगी स्ट्रीट लाइट लगवा दी जाएंगी। – बिपिन चंद्र मैठाणी, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीनगर।
