
श्रीनगर। आरटीई कार्यकर्ता की शिकायत पर रेनबो पब्लिक स्कूल में पहुंचे जांच दल ने प्रबंधन को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि यदि स्कूल ने मानकों की अनदेखी की तो मान्यता खतरे में पड़ सकती है।
मुख्य जांच अधिकारी जगमोहन सिंह रावत, खंड शिक्षा अधिकारी पौड़ी के नेतृत्व में मंगलवार सुबह जांच कमेटी रेनबो पब्लिक स्कूल पहुंची। आरटीई कार्यकर्ता कुशलानाथ ने शिकायत की थी कि स्कूल प्रबंधन आरटीई के तहत प्रवेश पा चुके 55 बच्चों से फीस ले रहा है। जांच कमेटी ने 10 अभिभावकों के बयान रिकॉर्ड किए हैं। उन्हाेंने स्कूल को आरटीई के तहत प्रवेश पाने वाले छात्रों से फीस न लेने के सख्त निर्देश दिए। कहा यदि ऐसे किसी छात्र से फीस ली गई है तो उसे तुरंत लौटा दिया जाए।
एमएल आर्य खंड शिक्षाधिकारी खिर्सू ने बताया कि स्कूल प्रबंधन दो परिसर संचालित कर रहा है। इनमें से मुख्य परिसर पौड़ी और दूसरा टिहरी जिले के अंदर है। मुख्य परिसर की पांचवीं तक की मान्यता खिर्सू ब्लॉक में है, लेकिन स्कूल प्रबंधन तीसरी तक की कक्षाएं ही यहां संचालित कर रहा है। इस पर स्कूल प्रबंधन को पांचवीं तक की कक्षाएं मूल परिसर में ही चलाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। जांच टीम ने प्रधानाचार्य की अनुपस्थिति पर भी नाराजगी जताई। टीम में बृजेश भट्ट बीआरसी और सुबोध चमोली समन्वयक भी शामिल थे।
जांच टीम भी सवालों के घेरे में
श्रीनगर। आरटीई कार्यकर्ता कुशलानाथ ने जांच टीम को ही कठघरे में खड़ा किया है। उनका आरोप है कि टीम पारदर्शिता नहीं दिखा रही। शिकायतों के बाद भी स्कूल प्रबंधन के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल को कार्रवाई से बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। कुशलानाथ ने आरोप लगाया कि पुख्ता शिकायतों के बावजूद जांच टीम कार्रवाई से बच रही है। अभिभावकों पर दबाव बनाकर झूठे बयान लिए जा रहे हैं। उनके मुताबिक स्कूल से बाहर किसी अन्य स्थान पर बातचीत की जानी चाहिए थी। कहा कि जांच कमेटी ने फीस वापस करने के आदेश दिए हैं। जबकि नियमानुसार आरटीई के तहत प्रवेश पाए किसी छात्र से फीस लेने पर स्कूल को दस गुना वापस देना होता है। उन्होंने किसी प्रशासनिक अधिकारी को टीम में शामिल करने की मांग की है। इसके अलावा जांच के समय अन्य निजी और सरकारी स्कूल के प्रधानाचार्य को बुलाना चाहिए। उन्होंने कहा यदि तीन महीने में कार्रवाई नहीं की गई तो बाल संरक्षण आयोग का दरवाजा खटखटाएंगे।
