स्कूल की दशा खराब, 600 में से रह गए 217 बच्चे

सोमेश्वर। ताकुला विकासखंड का सबसे पुराना राजकीय इंटर कालेज सोमेश्वर संसाधनों के अभाव से जूझ रहा है। 96 साल पूर्व बना स्कूल भवन जीर्ण-शीर्ण स्थिति में पहुंच गया है। छात्र-छात्राओं के बैठने के लिए पर्याप्त फर्नीचर और चटाइयां नहीं हैं। स्कूल में निरंतर छात्रों की संख्या में गिरावट आ रही है लेकिन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का इस ओर ध्यान नहीं है। 1979 में इस विद्यालय में 600 बच्चे पढ़ते थे लेकिन वर्तमान में छात्र संख्या 217 रह गई है।
आजादी से पूर्व 1917 में स्कूल के लिए सोमेश्वर के कुछ बोरा परिवारों ने विद्यालय स्थापित करने के लिए 126 नाली भूमि दान में दी। शुरुआत में जिला परिषद द्वारा संचालित स्कूल कक्षा आठ तक खुला। इसमें छात्रावास की भी सुविधा थी। 126 नाली में से कुछ हिस्से में स्कूल भवन बना। शेष भूमि में खेती, मछली और मुर्गीपालन भी किया जाता था। इससे स्कूल को भी आय होती थी। स्कूल में मछली तालाब आज बंजर पड़ा है। वर्तमान में स्कूल की 79 नाली भूमि महाविद्यालय को दे दी गई है। इस स्कूल के पास अब 47 नाली भूमि ही रह गई है।
जानकारी के अनुसार 1933 में स्कूल के छात्रावास में ही 81 बच्चों का प्रवेश था। 1968 में स्कूल का हाईस्कूल और 1979 में राजकीय इंटरमीडिएट कालेज में उच्चीकरण हुआ। उच्चीकरण के समय स्कूल में 600 से अधिक बच्चे अध्ययनरत थे। 1990-91 में स्कूल में 445, 1999-2000 में 391, 2006-07 में 364 बच्चों का प्रवेश था। स्कूल में छात्रों के नामांकन में हर वर्ष गिरावट आ रही है। वर्तमान सत्र में स्कूल में मात्र 217 बच्चे ही अध्ययनरत हैं। इनमें भी अधिकांश अनुसूचित जाति के बच्चे हैं। प्रधानाचार्य का पद 1990 से रिक्त है। स्कूल में 17 शिक्षक कार्यरत हैं। इधर रतुराठ निवासी 72 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक ध्यान सिंह बोरा ने स्कूल में गिरती छात्र संख्या पर चिंता जताते हुए कहा है कि विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से इस ओर ध्यान देना चाहिए। इधर खंड शिक्षा अधिकारी कमल किशोर आर्या का कहना है कि रिक्त पदों की सूचना शासन को भेजी गई है।

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