
रिवालसर (मंडी)। जिले की तीन धर्मों की पवित्र एवं ऐतिहासिक झील सौंदर्यीकरण को तरस रही है। लाखाें खर्च करने के बाद भी झील का सौंदर्यीकरण नहीं हो पाया है। ऐतिहासिक रिवालसर झील की अनदेखी से जहां स्थानीय लोग दुखी है वहीं पर्यटन कारोबार को भी बट्टा लग रहा है। जिला प्रशासन और स्थानीय निकाय सहित पर्यटन विभाग के अब तक के प्रयास सफल साबित नहीं हो सके हैं।
गुरु पद्मसंभव की तपोस्थली एवं पवित्र झील के सौंदर्यीकरण के लिए बौद्ध सर्किट योजना के तहत 2005 में करीब 54 लाख रुपये व्यय करने का प्रावधान किया था। बावजूद इसके झील और झील परिसर की दशा में कोई खास सुधार नहीं हो पाया है। झील में भरी गाद से पवित्र झील का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। स्थानीय निकाय बार-बार झील से गाद निकालने की बात करता है लेकिन अमल नहीं हो रहा।
स्थानीय देवराज, इंद्र सिंह, नीलमणि, मनोहर लाल, पवन कुमार, नरेश कुमार, गंगा राम, हेमराज और बालक राम ने कहा कि झील में गंदगी निरंतर बढ़ रही है। पानी दूषित हो गया है। बौद्ध सर्किट योजना के तहत स्वीकृत राशि से झील परिसर में लाइटेें लगाई गई थीं। लेकिन सभी लाइटें जलने से पहले ही बुझ गई। न वर्षा आश्रालय का कार्य पूरा हो सका और न ही पार्क बन पाया। पार्किंग सुविधा न होने से पर्यटकों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। इससे पर्यटकों और श्रद्धालुआें की संख्या में निरंतर कमी आ रही है। नगर पंचायत अध्यक्ष बंसी लाल ने कहा कि झील से गाद निकालने के प्रस्ताव पारित कर जिला प्रशासन को भेजा है। प्रशासन की स्वीकृति मिलने पर गाद को निकाला जाएगा।
