
चंबा। जिला सहकारिता विभाग में करीब बीस वर्ष से एक भी कर्मचारी की नियुक्ति नहीं हो पाई है।
इसका सीधा असर करीब चालीस हजार खाता धारकों पर पड़ रहा है। कर्मचारियों की कमी के चलते कामकाज पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।
एक-एक करके बीस वर्ष में जिले में 46 कर्मचारियों के पद खाली हो गए हैं। इसके अलावा कुछ कर्मचारी पदोन्नत होने के बाद अन्य जिलों में भेजे जा रहे हैं। मौजूदा समय में हालात ऐसे हैं कि विभाग के लिए स्वीकृत 65 पदों में से 46 पद खाली पड़े हैं। यहां तक कि विभाग के मुखिया यानी सहायक पंजीयक तक का पद भी खाली पड़ा है। जिले के लिए स्वीकृत निरीक्षकों के 17 में से 12 पद खाली चल रहे हैं। लिपिक के दस पद स्वीकृत हैं। इसमें मात्र एक पद भरा हुआ है। जिला कार्यालय में एक भी लिपिक नहीं है। निरीक्षक अंकेक्षण के 15 पद स्वीकृत हैं, जबकि इनमें मात्र चार पदों पर ही कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। चपड़ासी के 16 पद स्वीकृत हैं। इसमें केवल पांच पद भरे हुए हैं। इसके अलावा स्टेनो का एकमात्र पद भी नहीं भरा जा सका है। यह पद वर्ष 1995 से खाली चल रहा है। स्टाफ की कमी के कारण जिला में सहकारिता विभाग के सौजन्य से चलाई जा रही सोसाइटियों का कामकाज पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। पूरे जिले में सहकारिता विभाग के सौजन्य से विभिन्न प्रकार की 252 सोसाइटियां चल रही हैं। इनमें 130 प्राथमिक कृषि तथा सहकारी सभाएं हैं। इन सोसाइटियों के माध्यम से किसान-बागवानों को कृषि तथा अन्य प्रकार के ऋण उपलब्ध करवाए जाते हैं। लेकिन, मौजूदा समय में स्टाफ की कमी के कारण पचास से ज्यादा सोसाइटियां घाटे में चल रही हैं। इससे किसान-बागवानों को इन सोसाइटियों का कोई लाभ नहीं मिल रहा है। इस वर्ष तो कई सोसाइटियों का आडिट तक नहीं हो पाया है। इस संबंध में जिला अंकेक्षण अधिकारी तिलक राज चंद्रा ने माना कि स्टाफ की कमी के कारण विभाग का कामकाज काफी प्रभावित हो रहा है। इस समस्या के बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है।
