सैलानी बढ़े पर पर्यटन स्थल जस के तस

कुल्लू। हिमाचल को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले आज 43 वर्ष हो गए हैं। लेकिन, कुल्लू-मनाली का पर्यटन आज भी पुराने ढर्रे पर ही चल रहा है। हालांकि, इस अवधि में घाटी के पर्यटन को जहां खूब पंख लगे, वहीं सैलानियों की संख्या भी साल दर साल बढ़ती गई। 43 वर्ष पहले घाटी में मात्र गिने चुने सैलानी ही सैर सपाटे को आते थे। आज घाटी में आने वाले सैलानियों की संख्या तीस लाख के पार पहुंच गई है। लेकिन, हैरान भरा है कि घाटी में सैलानी तो बढ़े लेकिन यहां के पर्यटन स्थल 43 वर्ष बाद भी जस के तस हैं। इन पर्यटन स्थलों का आज तक विकास नहीं किया गया। घाटी के अनछुए पर्यटन स्थल कई मूलभूत सुविधाओं से दूर हैं। खासकर ठहरने की उचित व्यवस्था न होने के साथ-साथ सड़क, बिजली और पानी की भी कोई सुविधा नहीं है। होटलियर एसोसिएशन मनाली के अध्यक्ष अनूप राम ठाकुर कहते हैं कि बीते 43 साल में घाटी का पर्यटन कारोबार तो बढ़ा लेकिन टूरिस्ट प्वाइंटों व अनछुए पर्यटन स्थलों का कोई भी विकास नहीं हुआ है।

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ये हैं घाटी के मुख्य पर्यटन स्थल
जिला के मुख्य पर्यटन स्थल जो सरकार और विभाग के अनदेखी का दंश झेल रहे हैं। इनमें बिजली महादेव, जलोड़ी दर्रा, मठासौर, सरयोलसर, भृगुजोत, हामटा पीक, काईसधार, टकरासी बंगला, रघुपुरगढ़, तीर्थन वैली, सोझा,बागासराहन, खन्नीबाग, शुश सहित कई स्थल हैं जो पर्यटन के विकास की राह देख रहे हैं।

आठ में कुल्लू-मनाली आए सैलानी।
वर्ष सैलानी पहुंचे
2007 20,65,078
2008 21,14,584
2009 23,44,163
2010 25,29,697
2011 27,98,215
2012 32,26,445
2013 29,94,907 (अनुमानित)

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