
डलहौजी (चंबा)। प्रकृति ने खूबसूरती बिखेरने में तो कोई कमी नहीं रखी है, लेकिन सरकारी उदासीनता के कारण पर्यटन नगरी डलहौजी अपना रूप खोती जा रही है। हर वर्ष यहां पर आने वाले पर्यटकों की संख्या में कमी दर्ज की जा रही है। पर्यटन विभाग विश्व पर्यटन दिवस पर सिर्फ कुछ एक पर्यटकों को तलाश कर उनको टोपी पहनाकर अपने दायित्व से इतिश्री कर रहा है। टूटी-फूटी सड़कें, पर्यटन केंद्र बिंदुओं की बदहाली यहां की तस्वीर को बयां कर रही है। हर वर्ष यहां के होटलों से करोड़ों रुपये लग्जरी टैक्स के रूप में इकट्ठे तो किए जाते हैं, लेकिन पर्यटन नगरी की दिक्कतों को दूर करने के लिए फूटी कोड़ी खर्च नहीं की जाती। देश का प्रमुख पर्यटन स्थल होने के बावजूद यहां न तो कहीं दिशा सूचक और न हीं प्रमुख पर्यटन स्थलों को दर्शाने वाले साइन बोर्ड दिखते हैं। हैरानी की बात है कि स्थानीय पर्यटक सूचना केंद्र के सामने ही गलत बोर्ड लगा हुआ है। मिनी स्विड्जरलेंड के नाम से विख्यात खज्जियर की हालत भी कुछ ऐसी ही है। पर्यटन विभाग की योजनाओं की जानकारी पूछने पर जिला पर्यटन अधिकारी कार्यालय में आकर बात करने को कहते हैं। सूचना का अधिकारी के युग में पर्यटकों के फायदे की जानकारी तक नहीं दी जाती। डलहौजी की सूचना लेने के लिए पहले चंबा में मौजूद जिला पर्यटन अधिकारी के पास जाने की बात भी हैरान करने वाली है। अगर डलहौजी में निजी स्कूल न हों तो यहां पर्यटन की रही सही कसर भी पूरी हो जाए। गौरतलब है की निजी स्कूलों में देश भर के राज्यों के हजारो की संख्या में बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। उधर डलहौजी होटल एसोशिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र पूरी ने यह बात स्वीकार की है कि यहां हर वर्ष पर्यटकों की संख्या में कमी दर्ज की जा रही है। जिला पर्यटन अधिकारी भुवनेश्वरी वोहरा यहां की हालत को लेकर फोन पर कोई जानकारी देने से इनकार करती हैं। उनका कहना है कि इस संबंध में चंबा स्थित उनके कार्यालय में आकर ही बात करें।
