
रोहड़ू। बरसात के मौसम में सेब बगीचे यूरोपियन रेड माइट नामक रोग की चपेट में आ गए हैं। उद्यान केंद्र रोहडू में रोजाना माइट के दर्जनों मामले सामने आ रहे हैं। उद्यान विभाग के विशेषज्ञ पंचायतों में जाकर लोगों को माइट से सेब को बचाने के उपाय बता रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार माइट रोग के अधिक आक्रमण से फल तथा पौधे का विकास रुक जाता है। इसलिए माइट रोग की समय पर रोकथाम करना जरूरी है। उद्यान विकास अधिकारी रोहडू डा. आगर दास ने बताया कि माइट रोग के दर्जनों मामले उनके पास आ रहे हैं। लेकिन, बागवान माइट तथा मार्सोनिना रोग में पहचान नहीं कर पा रहे हैं। जानकारी के अभाव में बागवान माइट को समय पर नहीं रोक पा रहे हैं। इसलिए बागवानों को माइट के रोकथाम की जानकारी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि करासा तथा सीमा रंटाड़ी पंचायत में भी बागवानों को माइट रोग के प्रति जागरूक किया गया है। इसी तरह की मुहिम अन्य पंचायतों में भी चलाई जाएगी। उन्होंने बताया कि माइट के आक्रमण से सेब की पत्तियां तांबेनुमा रंग की हो जाती हैं। धीरे-धीरे फल का विकास रुक जाता है तथा फल पर रंग भी नहीं आता है। बागवान माइट की पहचान करने के लिए पत्तियों को ध्यान से देखें। पत्तियों के नीचे तथा ऊपर लाल रंग की छोटी-छोटी मकड़ियां ही माइट होती हैं। उन्होंने बताया कि माइट की रोकथाम के लिए मैडन 200 एमएल या फेनाजाक्विन 50 एमएल दो सौ लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। बगीचों में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। खरपतवार को बगीचों में पनपने न दें।
