
रोहडू। सेब बगीचों में मार्सोनिना कोरोनिया नामक रोग के लक्षण दिखना शुरू हो गए हैं। इससे बागवानों को अपनी फसल की चिंता सताने लगी है। बगीचों में समय से पहले ही पतझड़ का खतरा हो गया है। रोग से फल पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। बागवानी विशेषज्ञों के पास रोग फैलने के विभिन्न मामले सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों ने बागवानों को आवश्यक दवाइयों के छिड़काव की सलाह दी है। छाया और अधिक नमी वाले बगीचों में रोग के अधिक लक्षण दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अभी मार्सोनिना रोग शुरुआती चरण में है। अगर समय रहते बागवानों ने इसकी रोकथाम नहीं की तो बगीचा पुरी तरह बीमारी की चपेट में आ सकता है। शुरुआत में मार्सोनिना रोग सेब की पत्तियों पर दिखाई देता है। रोग से ग्रस्त पत्तियों की ऊपरी सतह पर गहरे हरे रंग के धब्बे नजर आते हैं। यह हरे धब्बे पहले भूरे और फिर गहरे भूरे रंग के हो जाते हैं। पत्तियों का शेष भाग पीले रंग का होता जाता है। रोग के पनपने से समय से पूर्व ही पतझड़ होता है। फलों का विकास भी रुक जाता है। अधिक वर्षा, नमी तथा तापमान में गिरावट के कारण यह रोग तेजी से फैलता है। विशेषज्ञों के पास रोजाना कई बागवान सेब की रोग ग्रस्त पत्तियां लेकर पहुंच रहे हैं।
खरपतवार न पनपने दें बगीचे में : आगर दास
उद्यान विकास अधिकारी डॉ. आगर दास ने बताया कि मार्सोनिना रोग के लक्षण बगीचों में नजर आने शुरू हो गए हैं। रोग के कई मामले भी उनके पास आ रहे हैं। अगर समय पर इस रोग की रोकथाम नहीं की गई तो बगीचे पूरी तरह इस रोग की चपेट में आ सकते हैं। उन्होंने बागवानों को सलाह दी है कि बगीचों में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। खरपतवार बगीचों में न पनपने दें। रोग की रोकथाम के लिए बागवान पांच सौ ग्राम मैनकोजेब तथा सौ ग्राम कारबेंडाजिम को दो सौ लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। साथ ही विशेषज्ञों से समय-समय पर सलाह जरूर लें।
