सेब ड्रॉपिंग से बागवानों को मोटी चपत

उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। लाहौल घाटी में इन दिनों सेब तुड़ान चरम पर है। बागवानों को सेब के उचित दाम तो मिल रहे हैं, लेकिन तुड़ाई से पूर्व फल झड़ने की समस्या से बागवानों को मोटी चपत लग रही है। जिन बगीचों में अभी तक सेब तुड़ान नहीं हुआ है, वहां भी सेब गिरने का क्रम जारी है। बगीचों में मोटे आकार के फल पेड़ों पर टिक नहीं पा रहे हैं। इससे बागवानों की मेहनत पर पानी सा फिर गया है। हालांकि, इन दिनों बागवानों की घाटी में उत्तम क्वालिटी के सेब प्रति पेटी 800 से 1000 रुपये तक बिक रही है, लेकिन फल झड़न समस्या ने बागवानों को परेशान कर दिया है। पट्टन घाटी के बागवान रमेश लाल, प्रेम सिंह, दुनी चंद, वीर सिंह, अनिल कुमार, पवन और संजू ने बताया कि उनके बगीचों में 20-25 प्रतिशत सेब फल पौधों से झड़ गए हैं। उन्होंने बताया कि बगीचों में गुणवत्ता तथा रंगदार सेब गिर रहे हैं। बागवानी विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्तमान में लाहौल घाटी में सौ हेक्टेयर भूमि पर सेब का उत्पादन हो रहा है। जबकि, 700 हेक्टेयर भूमि पर सेब के छोटे पौधे लहलहा रहे हैं। लाहौल घाटी के बागवानों का रुझान सेब उत्पादन की ओर साल दर साल बढ़ता जा रहा है। घाटी के बागवानों ने बागवानी विभाग से सेब में लगने वाले रोगों के समाधान के लिए शिविर लगाने की अपील की है। कृषि विज्ञान केंद्र बजौरा में तैनात फल विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. रमेश राणा ने बताया कि सेब तुड़ाई से 25 दिन पहले हारमोन की कमी से फल झड़ने की समस्या रहती है। उन्होंने बताया कि यह समस्या कोई नई बात नहीं है, लेकिन बागवानों को सेब तुड़ान से एक माह पहले प्लेनोफि क्स 45 मिली. दवाई का 200 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करना चाहिए। इससे फल झड़ने की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह दवाई बाजार में भी उपलब्ध है।

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