
खराहल (कुल्लू)। कुल्लू जिले के कई क्षेत्रों में सेब के विकास की अवस्था में ही ड्रॉपिंग शुरू हो गई है। पहले ही कई इलाकों में ओलों का कहर झेल चुके बागवानों के लिए यह दोहरी मार है। कुल्लू की ऊझी घाटी, मणिकर्ण घाटी, खराहल, बंजार, लगवैली और महाराजा वैली आदि क्षेत्रों में इन दिनों सेब के फल अंधाधुंध झड़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जून में ड्रॉपिंग हर साल होती है, लेकिन इस साल इससे ज्यादा नुकसान होने की आशंका है। किसानसभा अध्यक्ष देवराज नेगी और फ लोत्पादक मंडल अध्यक्ष महेंद्र उपाध्याय कहते हैं कि सिंचाई के अभाव में ही बागवानी की यह दशा हुई है। जिले की कई सिंचाई योजनाएं अनदेखी के कारण किसानों के खेतों तक भरपूर पानी मुहैया नहीं करवा रही हैं। प्रदेश को तीन सौ करोड़ रुपये से अधिक आय सेब का कारोबार सालाना दे रहा है तो सरकार क्यों सिंचाई के साधनों को विकसित करने में कतरा रही है? बागवान रामनाथ, अमित ठाकुर, कर्म चंद, देवराज, ज्ञान ठाकुर, चमन, बुद्धि प्रकाश, सतीश ठाकुर, महेंद्र, राजकुमार, अखिल राणा आदि का कहना है कि ड्रॉपिंगकी वजह नमी की कमी है। वहीं, बागवानी अनुसंधान कें द्र बजौरा के सहनिदेशक डॉ. जयंत कु मार ने बताया कि वैसे तो जून में ड्रॉपिंग हर वर्ष होती है। जिन बगीचों में अधिक फल लगे होते हैं, वहां फल गिर जाते हैं। उन्होंने कहा कि फ्लावरिंग के दौरान प्रतिकूल मौसम के कारण उचित पॉलीनेशन के अभाव से भी फल झड़ जाते हैं। लेकिन, अधिक सूखे के कारण भी यह समस्या पैदा हो जाती है। लिहाजा, बागवानों को इन दिनों सिंचाई करनी चाहिए।
