
कोटखाई (शिमला)। क्षेत्र की रतनाड़ी, बाघी और कलबोग पंचायतों में बागवानों को कीटनाशक दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं। बागवानों की सेब की फसल पर पत्ता मुड़न, सुंडिया, पउडरी मिल्डयू रोगों ने हमला बोल दिया है। सरकारी स्तर पर दवाइयां न मिलने से बागवानों को निजी दुकानों में महंगे दामों पर दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। बागवान हर रोज सरकारी केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन दवाइयां नहीं मिल रहीं। कीट हमले से अब बागवानों को फसल की चिंता सताने लगी है।
बाघी पंचायत के उप प्रधान मदन भींटा, कलबोग पंचायत के प्रधान कंवर सिंह और रतनाड़ी पंचायत के प्रधान ज्ञान ठाकुर ने बताया कि रतनाड़ी बाघी और कलबोग के उद्यान केंद्रों में दवाइयों की केवल चार-चार पेटियां ही मिल पाई हैं। क्षेत्र में लगभग एक हजार से अधिक बागवान हैं। एक पेटी में केवल 24 दवाइयों के पैकेट होते हैं। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि क्षेत्र में सेब की फसल पर रोगों का हमला शुरू हो गया है। बागवानों को किसी भी केंद्र से दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं। आर्थिक रूप से मजबूत बागवान तो बाजार से महंगे दाम पर दवाइयां खरीद रहे हैं लेकिन गरीब के लिए बाजार से दवाइयां खरीद पाना संभव नहीं है।
कोटखाई में पौध संरक्षण अधिकारी एनपी सिंह ने बताया कि जो दवाइयां विभाग द्वारा दी गई थीं वे उद्यान केंद्रों तक पहुंचा दी गई हैं। जैसे ही और दवाइयां उपलब्ध होंगी, बागवानों को दे दी जाएंगी।
