सुपरपॉवर INS विक्रांत के समंदर में उतरने के बाद भारत चुनिंदा देशों में शामिल

सुपरपॉवर INS विक्रांत के समंदर में उतरने के बाद भारत चुनिंदा देशों में शामिल

कोच्चि: भारतीय नौसेना के फौलादी इरादे और जज्बे को मजबूती देते हुये आखिरकार प्रथम स्वदेश निर्मित विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रांत को कोच्चि के कोचीन शिपयार्ड में समुद्र में उतार दिया गया। रक्षा मंत्री ए के एंटनी की पत्नी एलिजाबेथ एंटनी ने इसका उद्घाटन कियाह।

इस गरिमामय और ऐतिहासिक अवसर पर रक्षामंत्री समारोह के मुख्य अतिथि थे। जहाजरानी मंत्री जी.के. वासन ने समारोह की अध्यक्षता की। इस एतिहासिक समारोह के गवाह के रूप में नौ सेनाध्यक्ष एडमिरल देवेन्द्र कुमार जोशी ् इस विमानवाहक पोत के निर्माता कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड .सीएसएल. के महाप्रबंधक कोमोडोर काॢतक सुब्रमण्यम सहित कई अन्य नौसैनिक अधिकारी शामिल थे।

आईएनएस विक्रांत के जलावतरण के बाद भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया हैं जिनके पास विमानवाहक पोत के निर्माण, डिजायन और पोत संबंधी संरचनात्मक तकनीक में महारत हासिल है। भारतीय नौसेना में विक्रांत के शामिल होने के बाद भारत, अमेरिका, रूस , ब्रिटेन तथा फ्रांस के विशिष्ट क्लब का सदस्य बन जाएगा। इन देशों के पास विमानवाही पोतों की खासी तादाद है।

एंटनी ने निर्माता कोचीन शिपयाड्र्स लिमिटेड :सीएसएल: समेत तमाम साझेदारों से यह सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक प्रयास करने को कहा कि विमानवाहक पोत की डिलिवरी समय पर हो। उन्होंने कहा कि ‘‘समन्वय के अभाव’’ में अतीत में कई वर्ष बरबाद गए।

उल्लेखनीय है कि 260 मीटर लंबे और 60 मीटर चौड़े युद्धपोत का जलावतरण पूर्वयोजना से तीन साल पीछे है। इसे 2018 के अंत में नौसेना में तैनात किया जाएगा, लेकिन उसके पहले 2016 में इसका सघन परीक्षण होगा। युद्धक विमान मिग-29के, लाइट कंबैट एयरक्राफ्ट और कामोव:31 हेलीकाप्टरों को विमानवाहक पोत पर तैनात किया जाएगा और यह अन्य हथियार प्रणालियों से सुसज्जित होगा।

आईएनएस विक्रांत इसी नाम का दूसरा विमानवाहक पोत है। पहले ने 1971 में पाकिस्तान के साथ युद्ध में प्रमुख भूमिका निभाई थी। उसे 1997 में सेवा से हटा लिया गया था। भारत अभी एक विमानवाहक पोत आईएनएस विराट का संचालन कर रहा है। आईएनएन विक्रांत की संचालनात्मक सेवा में शामिल होने के बाद उसे सेवा से हटाए जाने की उम्मीद है। भारत को इस साल के अंत में उसका दूसरा विमानवाहक पोत एडमिरल गोर्शकोव मिलने वाला है। इसका नाम आईएनएस विक्रमादित्य रखा गया है।

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