सुक्खू सरकार शहरो की तर्ज पर ग्रामीण क्षेत्र में बने व्यावसायिक भवनों से अब करेगी टैक्स की उगाई, जानिए पूरी रिपोर्ट

सुक्खू सरकार शहरो की तर्ज  पर ग्रामीण क्षेत्र में बने व्यावसायिक भवनों से अब करेगी टैक्स की उगाई, जानिए पूरी रिपोर्ट

प्रदेश में अनेको प्रकार के टैक्स जनता पर डाले जा रहे है।  महंगाई और बेरोज़गारी सरकार के नियंत्रण में नहीं है । सरकार का ध्यान केवल जनता से टैक्स बसूली पर है आम जनता को कोई राहत नहीं मिल रही है । प्रदेश की जनता का सुक्खू सरकार से मोह भंग होता जा रहा है । गांव से शहर तक सरकार की जन विरोद्धी नीतियों पर चर्चा छिड़ चुकी है । प्रदेश के किसान बागवान कर्ज में डूबे है ग्रामीण क्षेत्रो में भवन निर्माण शहरो की तुलना में अधिक महंगा है मटेरियल व ट्रांसपोटेशन बहुत अधिक होने के कारण और व्यवसाय में गिरावट के चलते लोग बैंको के कर्ज तले डूबते जा रहे है सुक्खू सरकार मदद करने के बजाय जनता पर टैक्स पर टैक्स लगाए जा रही है । प्रदेश की जनता समझ चुकी है कि सरकार आर्थिक बोझ के तले दुब चुकी है और प्रदेश को नहीं संभाल प् रही है । ऐसे में मुख्यमंत्री सुक्खू को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए । ये शब्द ग्राम पंचायत मानू भाबिया के पूर्व प्रधान व पूर्व बीडीसी मेंबर मनोहर शर्मा ने सुक्खू सरकार से असंतुष्ट होकर कहे है । शहरों की तर्ज पर अब हिमाचल के गांवों में भी व्यावसायिक भवनों पर टैक्स लगेगा। ग्राम पंचायतों में स्थित होटल, दुकानों सहित सभी प्रकार के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से प्रति वर्ग फीट टैक्स वसूली होगी। पंचायतीराज विभाग ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के समक्ष भी विभाग योजना की प्रस्तुति दे चुका है। वित्तीय वर्ष 2025-26 से टैक्स लिया जाएगा। पंचायतों के सशक्तीकरण के लिए यह पहल की जा रही है।

आर्थिक तंगी से जूझ रही राज्य सरकार ने बीते वर्ष ही ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी के बिलों की वसूली शुरू की थी। अब ग्राम पंचायतों में कारोबार करने वालों पर टैक्स लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार ग्राम पंचायतों में स्थित होटल, होम स्टे, दुकानों, रेस्तरां, मैरिज पैलेस सहित अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से टैक्स लेगी। प्रति वर्ग फीट टैक्स कितना वसूला जाएगा, इसको लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

टैक्स की राशि तय करने को लेकर विभागीय स्तर पर मंथन जारी है। मंत्रिमंडल की बैठक में इसको लेकर फैसला लिया जाएगा। संभावित है कि बजट भाषण में टैक्स लगाने की घोषणा हो सकती है। पंचायतीराज एक्ट के तहत पंचायतों को कई प्रकार के टैक्स लगाने के अधिकार होते हैं। कई पंचायतों ने विभिन्न टैक्स लगाए भी हैं। कई पंचायतों में चूल्हा टैक्स भी लिया जा रहा है। इसके तहत पंचायत के तहत आने वाले हर परिवार से सालाना 30 रुपये टैक्स लिया जा रहा है। कांगड़ा की कुछ पंचायतों में आजकल आठ साल का एकमुश्त चूल्हा टैक्स लिया जा है।

हिमाचल में हैं 3615 ग्राम पंचायतें
प्रदेश में 3615 ग्राम पंचायतें हैं। इन सभी पंचायतों में स्थित व्यावसायिक भवनों पर टैक्स लगाया जाएगा। प्रदेश में इस साल के अंत में पंचायत चुनाव होने हैं। ऐसे में सरकार का यह फैसला कितना कारगर साबित होगा, यह चुनाव परिणामों से ही स्पष्ट होगा।

हिमाचल की ग्राम पंचायतों के सशक्तीकरण के लिए सरकार ने व्यावसायिक भवनों पर टैक्स लगाने का फैसला लिया है। घरेलू उपभोक्ता इसके दायरे से बाहर रहेंगे। टैक्स लगाने को लेकर जल्द ही विभाग की ओर से दिशा-निर्देश जारी कर दिए जाएंगे। – अनिरुद्ध सिंह, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री

Related posts