
केंद्र सरकार की भांति प्रदेश की सुक्खू सरकार भी लोगो को मिलने वाली सुविधाओं में लगातार कटौती कर रही है । साथ ही जनता पर विभिन्न प्रकार के शुल्क लगाकर जनता की कमर तोड़ने का काम कर रही है । यह चर्चा इन दिनों लोगो में खूब चल रही है प्रदेश की महिलाओ में भी नाराज़गी का माहौल देखा जा रहा है । उनका कहना है कि चुनाव से पहले कांग्रेस सरकार ने महिलाओ के उत्थान के कई सपने दिखाए थे जो सत्ता पर काबिज़ होते ही सरकार भूल रही है । बल्कि उल्टा महिलाओ को मिलने वाली सुविधाओं में कटौती करने का कार्य कर रही है।
हिमाचल प्रदेश में महिलाओं को बस किराये में 50 फीसदी छूट को घटाकर 25 फीसदी करने की तैयारी है। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) को घाटे से उबारने की कवायद के तहत सरकार यह फैसला लेने जा रही है। इसके अलावा प्रदेश के सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए एचआरटीसी बसों में निशुल्क सफर के स्थान पर न्यूनतम किराया तय करने पर भी विचार हो रहा है। वीरवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इसे लेकर चर्चा हुई ।
सरकार का तर्क
हालांकि निगम प्रबंधन के प्रयासों से आय में बढ़ोतरी होनी शुरू हुई है। बीते सालों के मुकाबले इस साल निगम की मासिक कमाई बढ़ी है। निगम अपने कर्मियों को महीने की पहली तारीख पर वेतन जारी कर रहा है। इससे पहले वेतन जारी करने की कोई निर्धारित तिथी नहीं होती थी, जिससे निगम के 13,000 कर्मियों को परेशानी का सामना करना पड़ता था।
आम जनता का तर्क
एचआरटीसी की बसों में इतनी भीड़ होती है कि लोग अपने गंतव्य तक पहुँचने के लिए खड़े खड़े सफर करते है । और निगम को अच्छी इनकम होती है । जिस निजी बस ऑपरेटर के पास एक बस हुआ करती थी अब चार से छह बसों के मालिक बन चुके है । इससे यह बिलकुल स्पष्ट होता है कि एचआरटीसी कुप्रबंधन के कारण घाटे में है जबकि रुट पर अच्छी कमाई होती है जनता से सुविधाए छीनने के बजाय सरकार को अपना सिस्टम सुधरने पर बल देने की आवश्यकता है ।
