सुंदरढुंगा में फंसे लोगों को भी बचाया सेना ने

बागेश्वर। सुंदरढुंगा ग्लेशियर मार्ग पर फंसे मुंबई के चार यात्रियों को सुरक्षित निकालकर सेना का बचाव दल आज यहां ले आया। इस दल ने दुर्गम मार्ग की तमाम बाधाओं को पार करने में सफलता प्राप्त की।
गोरखा रेजीमेंट की अल्मोड़ा स्थित बटालियन का बचाव दल पांच दिन पहले बागेश्वर पहुंचा। पिंडारी ग्लेशियर मार्ग से चंपावत के स्कूली बच्चों को निकालने के लिए बचाव दल ने पिंडर पर अस्थायी पुल बनाया। शनिवार की शाम स्कूली बच्चे सुरक्षित बागेश्वर पहुंचे। उधर शनिवार को सुंदरढुंगा ग्लेशियर के पास फंसे कंमांडर पीके सिंह, पत्रकार रूचिरा सिंह, उनका पुत्र 10 वर्षीय नील और फेमिना की पूर्व संपादक सत्या शरण को लेने के लिए तीसरा बचाव दल वहां पहुंचा। तमाम बाधाओं को पार करते हुए सोमवार सायंकाल सभी बागेश्वर पहुंच गए। इस अभियान के अंत तक गोरखा रेजीमेंट की बटालियन के सीओ कर्नल प्रशांत कांडपाल वहां मौजूद थे।
24 बीजीएस 12 पी: से 19 पी: तक।
-आनंद नेगी।

खतरों और बाधाओं के आगे दम तोड़ चुकी थी उम्मीद
संकट मोचक बनकर आए सेना के जवान
आनंद नेगी।
बागेश्वर। सुंदरढुंगा ग्लेशियर में फंसे मुंबई के यात्रियों को एक हफ्ते बाद सेना के बचाव दल ने बाहर निकाला। यात्रियों के लिए सेना के जवान संकट मोचक बनकर आए। 58 वर्षीया सत्या शरण ने तो जीने की उम्मीद छोड़ दी थी और एक पत्र में बसीयत नामा तक लिख दिया था।
सेना के बचाव दल के साथ यहां पहुंचीं सत्या शरण और रूचिरा सिंह ने बताया कि 16 जून को रास्ते बंद हो जाने पर स्थानीय पोर्टरों और अन्य लोगों ने उन्हें पत्थर के एक मकान में टिका दिया। जहां राशन भी था। उसके बाद 14 लोग किसी तरह नाले को पार करके जैतोली चले गए जबकि वह स्वयं आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं कर पाई। उन्होंने ग्रामीणों को अपने रिश्तेदारों के फोन नंबर दिए और ग्रामीणों के माध्यम से सलामती का संदेश भिजवाया। दूसरी तरफ पूरे मार्ग के ध्वस्त हो जाने तथा नदी नालों में पुल गिर जाने की खबर ने उन्हें मायूस किया। सत्या शरण ने बताया कि उन्होंने एक पेपर पर अपने मकान का बसीयत नामा तक लिख दिया था। वह आगे बढ़ने के बजाय संन्यास लेकर यहां की कंदराओं में रहने की बात सोचने लगी थी। शनिवार को सेना का बचाव दल उन्हें तमाम तरह के बाधाओं से निकालकर यहां ले आया। 10 वर्षीय नील के अनुसार शुरू में डर लगा। फिर मम्मी पापा की बातें सुनकर साहस बना रहा। यात्रियों ने कहा कि वह सेना के सहयोग से सकुशल लौट रहे हैं। भविष्य में फिर से आना चाहेंगे। किंतु जोखिम भरे स्थानाें पर नहीं जाएंगे।

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