
शिमला। कहने को तो टुटू राजधानी का उपनगर है पर यहां की हालत किसी गांव से भी गई गुजरी है। नगर निगम में शामिल होने के सालों बाद भी यह उपनगर सीवरेज कनेक्टिविटी को तरस रहा है। जाने कितने ही चुनाव देख चुका टुटू सीवरेज और पानी की समस्या हल होने का आश्वासन मिलने पर कइयों को सत्ता तक पहुंचा चुका है। लेकिन सत्ता में पहुंचने वालों ने यहां मुड़कर कभी नहीं देखा।
करीब तीन हजार मकानों के लिए सीवरेज और घरों से निकलने वाले पानी को ठिकाने लगाने की कोई व्यवस्था नहीं है। लोगों ने अपने स्तर पर टैंक बनाए हैं। टुटू क्षेत्र कभी पंचायत, कभी नगर पंचायत, कभी साडा तो कभी नगर निगम में शामिल रहा, मगर यहां सुविधा नहीं मिली। भवनों के नियमितीकरण न होने से भवन मालिक पानी, बिजली कनेक्शन लेने को तरस रहे है। घरों से निकलने वाला बाथरूम, किचन का पानी नालियों में बहता है। शौचालय के लिए भी अपने स्तर पर सीवरेज टैंक बनाने पड़े हैं। जेएनएनयूआरएम की नगर निगम के लिए 126 करोड़ के वाटर सीवरेज प्रोजेक्ट का भी टुटू को लाभ नहीं मिला। यहां घरों की सीवरेज लाइन से कनेक्टिविटी शून्य है। उधर, पार्षद निर्मला चौहान कहती हैं कि 2012 में उन्होंने एमसी हाउस में सीवरेज लाइन बिछाने का मामला उठाया था। जवाब मिला था कि मार्च 2013 तक प्लांट निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। लेकिन अभी तक प्लांट के लिए जगह तक का चयन नगर निगम नहीं कर पाया है। मामला फाइलों में दफन है।
