सीपीएफ के पंद्रह हजार केस लंबित

चंबा। महालेखाकार कार्यालय शिमला के तत्वावधान में स्थानीय बचत भवन में आयोजित दो दिवसीय सेमिनार के अंतिम दिन भी आहरण एवं वितरण अधिकारियों व पेंशनरों को अहम जानकारियां मुहैया करवाई गईं। समापन अवसर पर मौजूद उप महालेखाकार विवेक भास्कर ने कहा कि लेखा विभाग हर तीमाही में एक जिला का चयन करके पेंशन आदलतें व सेमिनार आयोजित कर रहा है। इसके सार्थक व सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। भास्कर ने बताया कि डीडीओज की ओर से भेजे जा रहे त्रुटि पूर्ण दस्तावेजों के कारण 500 से भी अधिक पेंशन के मामले अदालत में लंबित पड़े हैं। उन्होंने बताया कि इसी तरह सीपीएफ के 15 हजार मामले लंबित हैं। इनमें 800 से अधिक केस चंबा जिला के हैं। उन्होंने सभी विभागाध्यक्षों व डीडीओज से कहा है कि वे अपने विभागों से संबंधित कर्मचारियों के मामले तय दिशा-निर्देशों के तहत समय पर निपटाने में भूमिका निभाएं। इस अवसर पर नए पेंशन नियमों, जीपीएफ, सीपीएफ नामित सदस्यों, पे बिल रजिस्टर सहित अन्य अहम विषयों पर विस्तार से जानकारी मुहैया करवाई गई। एजी कार्यालय से आए नरेंद्र कुमार व विजय कुमार ने बताया गया कि अगर कोई कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद अपनी भविष्य निधि को रिटेन रखना चाहता है, तो वह ऐसा कर सकता है। इसके लिए वह संबंधित विभागाध्यक्ष को लिखेगा और विभागाध्यक्ष इस पर आर्डर पास करके एजी ऑफिस को भेजेगा। एजी ऑफिस के अधिकारियों ने कहा कि विभाग अध्यक्ष का आर्डर पास होने के बाद ही भविष्य निधि को रिटेन रखा जा सकेगा। इस पर कर्मचारी को न तो टैक्स देना पड़ता है और ब्याज भी बाकी कर्मियों की तरह ही मिलता है। विभाग अध्यक्ष कर्मचारियों के जीपीएफ व सीपीएफ के लिए नामित सदस्यों का विवरण तय फारमेट में पहले ही मुहैया करवाएं। अगर यह जानकारी पहले से नहीं है, तो विभागाध्यक्ष या डीडीओ को परिवार के सभी वैध उत्तराधिकारियों की सूची देनी होगी। इसके अलावा संशोधित वेतन के निर्धारण व अन्य कई जानकारियां दी गईं। सेमिनार के दूसरे दिन डलहौजी, भटियात, तीसा और पांगी के आहरण एवं वितरण अधिकारी व पेंशनर मौजूद रहे।

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