
धर्मशाला। मुख्यमंत्री विद्यार्थी स्वास्थ्य योजना का नाम बदल गया है। अब इसका नाम राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम रखा गया है। योजना के तहत स्कूली बच्चों में पाई जाने वाली जटिल बीमारियों का समाधान किया जाएगा। विशेषज्ञ चिकित्सक स्कूलों में लगने वाले शिविरों में बच्चों का चेकअप करेंगे। इससे बच्चों में पाई जाने वाली बीमारियों का उपचार छोटी उम्र में ही हो जाएगा।
सीएमओ डा. ध्रुव सिंह गुरुंग ने बताया कि योजना के तहत क्रिटीकल कंपोनेट को जोड़ा गया है। इन कंपोनेट केआधार पर ही बच्चों का इलाज किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बच्चों का चेकअप करने के बाद गंभीर बीमारी की सूरत में अस्पतालों में चेकअप होगा। अब गंभीर बीमारियों का बड़े स्तर के अस्पतालों में इलाज करवाने पर प्रधानाचार्य और मुख्य अध्यापक प्रमाण पत्र जारी करेंगे। उन्होंने बताया कि ऐसे बच्चों का आईजीएमसी और टांडा मेडिकल कालेज में निशुल्क इलाज होगा। साप्ताहिक आयरन फोलिक एसिड कार्यक्रम के तहत हर स्कूल में आयरन की गोलियां भेजी जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग ने एक वर्ष के लिए दवाइयां खरीद ली हैं। अध्यापक और हेल्परों को भी दवाइयां खिलाई जाएंगी। उन्होंने बताया कि बच्चों को हर बुधवार को दवाई दी जाएगी।
इसके अलावा जिला स्तरीय कमेटी भी बनाई गई है। इसमें उपायुक्त को चेयरमैन, सीएमओ को सदस्य, एमओएच को सदस्य सचिव, उपनिदेशक हायर व एलीमेेंटरी और प्रधानाचार्य डाइट को सदस्य बनाया गया है।
