सीएम वीरभद्र के बचाव में उतरे ये चार बड़े मंत्री

Stokes, Bali, Mukesh and Anil comes to defend cm
सीएम वीरभद्र सिंह पर भाजपा के सीधे हमलों के बाद अब सरकार के चार कैबिनेट मंत्री मुख्यमंत्री के बचाव में उतर आए हैं। पहली बार सारे वरिष्ठ मंत्रियों ने अपने सीएम का बचाव किया है।

सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री विद्या स्टोक्स, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री जीएस बाली, उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री और पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री अनिल शर्मा ने साझा बयान जारी कर भाजपा के हमलों को दुर्भावना से ग्रस्त करार दिया।

इन मंत्रियों ने कहा कि वीरभद्र सिंह पर व्यक्तिगत आक्रमण करना भाजपा नेताओं का एक सूत्रीय कार्यक्रम बन गया है, लेकिन इससे प्रदेश सरकार की सेहत पर कोई असर पड़ने वाला नहीं है। भाजपा की दो दिवसीय बैठक नकारात्मक मानसिकता को दर्शाती है।

जांच से बौखलाकर सीएम पर कर रहे हमला

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मंत्रियों ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की तैयार की गई चार्जशीट के आधार पर धूमल एवं उनके परिवार और अन्य भाजपा नेताओं पर चल रही जांच से पूर्व मुख्यमंत्री बौखला गए हैं। इसलिए भाजपा कुंठा और हताशा में तथ्यहीन बयानबाजी कर वीरभद्र सिंह को व्यक्तिगत तौर पर निशाना बना रही है।

प्रदेश भाजपा लगातार कांग्रेस सरकार को गिराने की नापाक इरादे पाले हुए है। भाजपा नेताओं ने कहा था कि केंद्र में नई सरकार बनते ही हिमाचल की कांग्रेस सरकार गिर जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

धूमल ने अपने दोनों कार्यकाल में वीरभद्र सिंह को निशाने पर रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि धूमल ही हैं जो प्रदेश में विद्वेष और उत्पीड़न की राजनीति लेकर आए।

‘द्वेष भावना से काम करती रही धूमल सरकार’

Dhumal government works in wrong spirit
चारों मंत्रियों ने भाजपा नेताओं को याद दिलाया कि धूमल ने 1998 से 2003 और 2007 के अपने कार्यकाल के दौरान वीरभद्र सिंह के खिलाफ व्यक्तिगत विद्वेष की भावना से कार्य किया था। धूमल सरकार केवल यहीं नहीं रुकी बल्कि सीबीआई को भी 32 सूत्रीय चार्जशीट सौंप दी।

उस समय केन्द्र और राज्य दोनों जगह भाजपा की सरकारें थीं, लेकिन रिपोर्ट आने के बाद वीरभद्र सिंह को क्लीन चिट मिली। इसी तरह अन्य मामलों में भी मुख्यमंत्री बेदाग साबित हुए हैं।

मंत्रियों ने कहा कि वीरभद्र सिंह ने अपने ऊपर बनाए गए झूठे मामलों व जांच के बावजूद सत्ता में आने पर बदले की राजनीति नहीं की। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में किसी भी राजनीतिक विरोधी पर एक भी मामला दर्ज नहीं किया गया था।

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