
सुंदरनगर (मंडी)। सुंदरनगर के बीएसएल जलाशय से सिल्ट निकासी का काम शुरू हो गया है। बीएसएल प्रबंधन ने इस काम के लिए अपने तीन में से दो ड्रेजरों को लगा दिया है। बीएसएल प्रबंधन इसे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सुझावों पर अमल बता रहा है, लेकिन जलाशय में दो ड्रेजरों के काम करने से पहले ही दिन सुकेती खड्ड में सिल्ट की बाढ़ आ गई। बारिश होने की स्थिति में खड्ड का जलस्तर बढ़ने से इसमें बह कर आने वाली सिल्ट बल्ह घाटी के खेत- खलिहानों में दोगुनी मार कर सकती है। इससे घाटी के किसानों में बीएसएल प्रबंधन के प्रति रोष है। वहीं सिल्ट फेंकने के पहले ही दिन पिछले दस माह से खड्ड में पल रही मछलियां तथा अन्य जलचर अकाल मौत का ग्रास बन रहे हैं। सुंदरनगर के बीएसएल जलाशय से निकलने वाली सिल्ट के स्थाई समाधान के लिए राज्य के उच्च न्यायालय ने बीएसएल प्रबंधन को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सुझावों पर अमल करने को कहा है। जिसके अनुसार बरसात के तीन माह जुलाई, अगस्त और सितंबर में ही जलाशय से सिल्ट निकालने का काम किया जाता है। सिल्ट निकासी का काम शुरू होने के पहले ही दिन सुकेती की निर्मलधारा अब सिल्ट युक्त हो गई है। भाजपा किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष रामचंद्र शर्मा का कहना है कि हर वर्ष सुकेती खड्ड के किनारे रहने वाले किसानों को सिल्ट की मार झेलनी पड़ती है। इससे सैकड़ों बीघा उपजाऊ जमीन बर्बाद होकर रह गई है। बरसात में सिल्ट खेतों में घुसने से उनकी फसलें भी बर्बाद हो जाती हैं। उन्होंने सरकार से सिल्ट की समस्या कास्थाई समाधान निकालने की मांग की है। इधर, बीबीएमबी के चेयरमैन एबी अग्रवाल का कहना है कि सुंदरनगर स्थित बीएसएल जलाशय से केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशा निर्देशों के अनुसार ही सिल्ट निकासी का काम किया जा रहा है। इस मामले में जो भी निर्देश दिए गए हैं, उनका प्रबंधन पूरी तरह से पालन कर रहा है।
