सिरमौर में हर्बल खेती पर खर्च होंगे दो करोड़

ददाहू (सिरमौर)। जिले के संगड़ाह एवं शिलाई विकास खंडों में औषधीय खेती एवं विपणन परियोजना के के लिए आगामी चार वर्षों में दो करोड़ की राशि व्यय की जाएगी। जबकि प्रदेश के आठ खंडाें में इस परियोजना के तहत नौ करोड़ रुपये व्यय करने का प्रावधान किया गया है। ताकि किसान औषधीय पौधों का उत्पादन करके आय का एक अतिरिक्त साधन बना सकें।
यह जानकारी मुख्य संसदीय सचिव विनय कुमार ने दी। वह रेणुका निर्वाचन क्षेत्र के संगडाह, माईनाबाग के प्रवास के दौरान लोगों की समस्याओं को सुन रहे थे। उपस्थित लोगों के साथ चर्चा करते उन्हाेंनेे कहा कि प्रदेश को हर्बल राज्य बनाना मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का ड्रीम प्रोजेक्ट है। उन्होंने इस बंद पड़ी परियोजना को दोबारा आरंभ करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। प्रदेश में औषधीय पौधों की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु एवं वातावरण उपलब्ध है। औषधीय पौधों की खेती से जहां पर्यावरण का संरक्षण होगा वहीं पर किसानों के लिए एक आमदनी का साधन भी सृजित होगा।
प्रदेश के चार जिलों के चयनित आठ विकास खंडों में इस वर्ष के दौरान किसानों को 47 लाख औषधीय पौधों का वितरण किया जाएगा। इसपर एक करोड़ 26 लाख रुपये की राशि व्यय होगी। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद विभाग द्वारा औषधीय पौधों का क्रय कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर, बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी, आईआईआईएम जम्मू, आईएसएम जोगिंद्रनगर एवं आयुर्वेद विभाग के हर्बल गार्डन से किया जाएगा। इन्हें किसानों को निशुल्क उपलब्ध करवाया जाएगा।

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