सियासी हलचल : जम्मू-कश्मीर में बदलाव की चर्चा, दिल्ली पहुंचे अब्दुल्ला

सियासी हलचल : जम्मू-कश्मीर में बदलाव की चर्चा, दिल्ली पहुंचे अब्दुल्ला

जम्मू
जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ दिनों से सियासी खिचड़ी पक रही है। केंद्र से कश्मीर आधारित पार्टिर्यों के नेताओं की ट्रैक-2 पर बातचीत चल रही है। नेशनल कांफ्रेंस प्रमुख डॉ. फारूक अब्दुल्ला के हालिया बयान कि पार्टी परिसीमन के खिलाफ नहीं है और केंद्र से बातचीत के सारे विकल्प खुले हुए हैं के कई मायने निकाले जा रहे हैं। फारूक के बयान के अगले ही दिन वीरवार को उमर अब्दुल्ला के दिल्ली पहुंचने से सियासी सरगर्मी को और बल मिला है। इसे परिसीमन तथा विधानसभा चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने की तैयारी में है। इसके चलते परिसीमन आयोग ने भी गतिविधियां तेज कर दी हैं। कोरोना महामारी की वजह से पिछले काफी समय से परिसीमन का काम गति नहीं पकड़ पा रहा था। कहा जा रहा है कि परिसीमन को अगस्त-सितंबर तक पूरा करने की कोशिश है। इसके बाद विधानसभा चुनाव इस साल के अंत तक या फिर मार्च तक कराए जा सकते हैं। केंद्र तथा विभिन्न राजनीतिक दलों का मानना है कि जनता केंद्रित सरकार होनी चाहिए जिससे मौजूदा सरकार तथा लोगों के बीच दूरियां कम हो सकें। 

पिछले सप्ताह अपनी पार्टी प्रमुख अल्ताफ बुखारी ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर राज्य के राजनीतिक हालात तथा लोगों को हो रही परेशानियों के बाबत बात की थी। इसके बाद उप राज्यपाल मनोज सिन्हा की भी अमित शाह से रविवार को मुलाकात हुई। अब ताजा घटनाक्रम के तहत गुपकार गठबंधन के प्रमुख नेकां अध्यक्ष फारूक ने दिल्ली दरबार से बातचीत की इच्छा जताने के साथ परिसीमन प्रक्रिया के खिलाफ भी न होने की बात कहकर यह संकेत दे दिया है कि पार्टी सांसद अगली बैठक में शामिल हो सकते हैं। परिसीमन आयोग की पहली बैठक में नेकां सांसदों ने किनारा कर लिया था।
 
सुरक्षा बलों की तैनाती से अटकलों का बाजार गर्म
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों की 60 कंपनियों के लौटने से अटकलों का बाजार गर्म है। इसे राज्य के दर्जे की बहाली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। चर्चा है कि जम्मू को राज्य का दर्जा देने की तैयारी है। इसलिए चुनावी ड्यूटी में गई फोर्स को बुला लिया गया है। अनुच्छेद 370 हटाने पर पांच अगस्त 2019 से ही सुरक्षा बलों की ये कंपनियां यहां तैनात थीं। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यह सब कुछ इतनी जल्दी नहीं हो सकता। इसके लिए कई प्रक्रियाओं को अपनाना होगा।

कानाफूसी के बीच उमर अब्दुल्ला पहुंचे दिल्ली
जम्मू-कश्मीर में प्रशासनिक एवं राजनीतिक बदलावों की सुगबुगाहट के बीच नेशनल कांफ्रेंस (एनसी) नेता उमर अब्दुल्ला दिल्ली पहुंचे। बुधवार को लंबे समय बाद गुपकार एलायंस की श्रीनगर में हुई बैठक के ठीक बाद उमर के दिल्ली आने के कई मायने लग रहे हैं। गुपकार बैठक के बाद एनसी अध्यक्ष फारुख अब्दुल्ला के कथित नरम रुख ने केंद्र शासित प्रदेश में एक बार फिर बड़े बदलाव की चर्चा को और हवा दे दी है।

नेशनल कांफ्रेंस ने केंद्र को संकेत दिया है कि वह जम्मू-कश्मीर की चल रही जटिल परिसीमन प्रक्रिया पर अब अपना सख्त विरोध नहीं जताएगी। साथ ही फारुख ने यह कह कर कि केंद्र जब भी बुलाएगा जाना पड़ेगा, अफवाहों का बाजार और गर्म कर दिया है। 

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