
श्रीनगर
पाकिस्तान में बैठे आकाओं से संपर्क में रहने के लिए कश्मीर घाटी से आतंकी वर्चुअल सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं। संचार सेवाओं की इस आधुनिक और नई तकनीक ने सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। पुलवामा हमला मामले में ऐसे 40 से ज्यादा सिम इस्तेमाल किए गए थे। इसका खुलासा राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने जांच में किया था। वर्तमान में कश्मीर घाटी में इस तरह के कई सिम कार्ड एक्टिव होने की सूचना है, जिसकी जांच करना टेढ़ी खीर बना हुआ है।
वर्चुअल सिम कार्ड एक आभासी सिम है, जिसे कंप्यूटर के जरिए नंबर के माध्यम से जारी किया जाता है। सेवा प्रदाता विदेश से नंबर जारी करता है, जिसे इसका यूजर अपने स्मार्टफोन पर सेवा प्रदाता की मोबाइल एप लोड कर इस्तेमाल करता है।
इसी एप से नंबर को व्हाट्सएप, फेसबुक, टेलीग्राम अथवा ट्विटर से जोड़ दिया जाता है। ऐसे माध्यम से कॉल, मेसेज से लेकर अन्य तरह के संवाद को पकड़ना खासा मुश्किल है। पुलवामा हमले की जांच में खुलासा होने के बाद से घाटी में ऐसी कई वर्चुअल सिम कार्ड एक्टिव होने की सूचना है।
एक अधिकारी ने बताया कि तकनीक नई होने की वजह से इससे जुड़े नेटवर्क को भेदना सुरक्षा एजेंसियों के सामने मुश्किलें आ रही हैं। वर्चुअल सिम कार्ड जारी करने की प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका भी ज्यादा रहती है, जिससे इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए भी काम किया जा रहा है।
अमेरिका समेत कई देशों से जारी हो रहे सिम कार्ड
वर्चुअल सिम कार्ड जारी करने वाले सेवा प्रदाताओं में अमेरिका समेत कई देशों की कंपनियां शामिल हैं। ज्यादातर वर्चुअल सिम अमेरिका, कनाडा, यूके, इस्राइल, पोर्टो रिको, कैरिबियन आइलैंड से जारी हो रहे हैं। पुलवामा हमला करने वाले सूसाइड बॉंबर ने जिस सिम का इस्तेमाल किया था, उसकी डिटेल अमेरिका से मांगी गई थी।
इसी प्रक्रिया के दौरान वर्चुअल सिम कार्ड के इस्तेमाल का खुलासा हुआ था। 26/11 के मुंबई हमले में भी वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीआईआईपी) तकनीक का इस्तेमाल हुआ था। इटली की एक कंपनी ने जावेद इकबाल के नाम से 300 मर्तबा पैसा ट्रांसफर किया था, लेकिन जांच में पता चला कि जावेद इकबाल निर्दोष था, जिसके नाम का कंपनी ने गलत तरीके से इस्तेमाल किया था।
पुंछ में आतंकी ठिकाना ध्वस्त, हथियारों का जखीरा बरामद
जिले की सुरनकोट तहसील में सुरक्षा बलों ने रविवार को आतंकी ठिकाना ध्वस्त कर हथियारों का जखीरा बरामद किया। माना जा रहा है कि किसी वारदात की फिराक में आतंकियों ने हथियार छिपा रखे थे। समय पर हथियारों की बरामदगी कर सुरक्षा बलों ने आतंकियों की साजिश को नाकाम करने में सफलता हासिल की है।
सूचना के आधार पर एसओजी तथा 16 राष्ट्रीय राइफल्स ने सुरनकोट तहसील के बहराम गल्ला से पीर पंजाल के पहाड़ों की तरफ तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान गिरीजन गली जंगल क्षेत्र में एक आतंकी ठिकाना मिला। यहां से एक एके 56 राइफल, एक पिस्तौल, एके राइफल की तीन मैगजीन व 150 गोलियां बरामद की गईं।
पुलिस का कहना है कि आतंकियों ने यह हथियार किसी साजिश के तहत ही छिपाकर रखे थे ताकि वारदात को अंजाम दिया जा सके। आतंकी ठिकाना मिलने के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। कई स्थानों पर चेकिंग भी चलाया गया ताकि इस बारे में कोई सुराग हाथ लग सके। सुरनकोट पुलिस ने मामला दर्ज कर इसकी जांच शुरू कर दी है कि हथियार किसने रखे।
बारामुला में ड्रोन से आतंकियों की तलाश
उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले में रविवार को गांव में छिपे आतंकियों की तलाश में ड्रोन को लगाया गया। पूरे इलाके की घेराबंदी कर घर-घर तलाशी ली गई। हालांकि, आतंकियों का कोई सुराग हाथ नहीं लगा। सुरक्षाबलों को नोपोरा गांव में दहशतगर्दों के छिपे होने का इनपुट मिला। इस आधार पर पुलिस, सेना व सीआरपीएफ ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर ली। चूंकि गलियां संकरी थीं, इस वजह से ड्रोन के जरिये आतंकियों का सुराग लगाने की कोशिश की गई। इसके साथ ही प्रत्येक घर को भी खंगाला गया। चार से पांच घंटे तक चले अभियान के बाद भी जब आतंकियों का कोई सुराग हाथ नहीं लगा, तो ऑपरेशन को स्थगित कर दिया गया। पुलिस ने बताया कि इलाके में सुरक्षा कड़ी रखी गई है ताकि आतंकियों की कोई सूचना मिले तो तत्काल कार्रवाई की जा सके।
