साहब आए नहीं, कर्मचारी सेंक रहे धूप

शिमला। कमला नेहरू अस्पताल टीम ने वीरवार को उपायुक्त कार्यालय का जायजा लिया। सुबह के पौने बारह बज रहे हैं और हम खड़े हैं सुगम केंद्र के ऊपर वाले फ्लोर पर। हमारी मुलाकात पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त राजेंद्र कुमार से हुई। राजेंद्र जी शोघी के आनंदपुर के पटयूड़ गांव से आए हैं। बात शुरू हुई तो इन्होंने बताया कि पिछले दो दिन से आधार कार्ड की पूछताछ के लिए आ रहे हैं। पहले संतोषजनक जवाब नहीं मिला और आज सूचना पट्ट पर ‘आधार कार्ड चार दिन नहीं बनेगा’ की सूचना चस्पां है। इससे पहले राजेंद्र एडीएम कार्यालय के ठीक सामने बने आधार कार्ड काउंटर पर भी गए थे। यहां भी इन्हें कोई कर्मचारी नहीं मिला।
इसके बाद हमें ड्राइविंग लाइसेंस फार्म जमा करवाने पहुंचे न्यू शिमला के करन ठाकुर और भीष्म प्रताप मिले। पूछने पर इन्होंने बताया कि सीट पर कोई नहीं है। पता नहीं कर्मचारी कहां हैं। फागू के दिनेश भारद्वाज बताते हैं कि ड्राइविंग टेस्ट का फार्म जमा करवाना है। लाइसेंस को एलटीवी करवाना है। इस फार्म को जमा करवाने के लिए सुगम केंद्र में कभी ऊपर, कभी नीचे भाग रहा हूं। एक घंटा हो गया, परेशान हो गया हूं। इसी दौरान शोघी के दिवेश शर्मा और कपिल कुमार ने सुगम केंद्र के बाहर धूप में खड़ी महिलाओं की ओर संकेत करते हुए कहा ये तो रही मैडम जी। अब तक कर्मचारियों को ‘अमर उजाला’ की टीम की भनक लग चुकी थी। लिहाजा, कर्मचारी सीटों की ओर जाने लगे थे।
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तहसीलदार सीटों से नदारद
शिमला शहरी और ग्रामीण तहसील के बाहर सुबह से लोगाें का जमघट लगा हुआ था। दोपहर के साढ़े बारह बज चुके थे लेकिन सीटों पर कोई भी तहसीलदार नहीं बैठे थे। पंथाघाटी से आए कैलाश शर्मा ने कहा कि सुबह से इंतजार कर रहा हूं। मुझ जैसे दर्जनों लोग परेशान हैं। कोई बता रहा है कि बैठक में गए हैं। बैठक इतनी जरूरी है तो शाम चार बजे के बाद कर लो। क्यों आम आदमी के बार बार चक्कर कटवा रहे हो। साहब की गैर मौजूदगी में कर्मचारी भी सीटों से गायब रहे। साहबों का इंतजार कोई बैंच पर बैठ कर रहा है, तो कोई कोने में जाकर सिगरेट फूंक रहा है। कोई कैंटीन में चाय पीकर वक्त काट रहा है।

औरों को नसीहत, खुद मियां फजीहत
‘औरों को नसीहत खुद मियां फजीहत’ की कहावत उपायुक्त कार्यालय पर चरितार्थ होती नजर आती है। पूरे शहर में दुकानदारों और ढाबों वालों को खाद्य पदार्थों की रेट लिस्ट न लगाने पर जुर्माना करने वाले प्रशासन की टीम अपनी कैंटीन के मामले में फिसड्डी है। इसी कैंटीन से उपायुक्त कार्यालय और जिला खाद्य नियंत्रक कार्यालय को चाय-नाश्ता जाता है। लंच भी यहीं तैयार होता है। उपायुक्त कार्यालय में काम करवाने आने वाले आम आदमी भी यहीं पर चाय की चुस्की लेता नजर आता है। यहां बिक रहे खाद्य पदार्थों का सही मूल्य क्या है, इसका आम आदमी को क्या पता। जितने पैसे कैंटीन संचालक ने मांगे, उतने थमा दिए। कैंटीन संचालक कमल ठाकुर ने कहा कि बीते दो साल से कैंटीन चला रहा हूं। रेट लिस्ट तो नहीं लगा रखी है।


सुगम केंद्र में इन अफसरों की है ड्यूटी
– नायब तहसीलदार, सुबह साढ़े दस से दोपहर बारह बजे तक
– तहसीलदार रिकवरी, दोपहर बारह बजे से डेढ़ बजे तक
– डीआरओ, दो से तीन बजे तक
– एसी टू डीसी, तीन से चार बजे तक
– एडीएम (कानून व्यवस्था) सोमवार से बुधवार शाम चार से साढ़े चार बजे
– एडीएम (प्रोटोकाल) वीरवार से शनिवार शाम चार से साढ़े चार बजे

क्या कहते हैं उपायुक्त
उपायुक्त दिनेश मल्होत्रा ने कहा कि सुगम केंद्र में कर्मचारी के छुट्टी होने पर आधार कार्ड से संबंधित कामों में दिक्कत पेश आई होगी। कैंटीन में रेट लिस्ट लगवाने के निर्देश दे दिए जाएंगे। सभी तहसीलदार दोपहर एक बजे तक मेरे साथ बैठक में थे। जहां तक सुगम केंद्र में रोटेशन के आधार पर अफसरों की तैनाती की बात है, यह शुरू की गई थी। यह रूटीन में चलें और लोगों को फायदा मिल सके इसके लिए शीघ्र ही ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। दस दिन के भीतर शिमला शहर तहसील के लिए अलग से कार्यालय चलाने के लिए भवन की व्यवस्था की जा रही है। ऐसे में ग्रामीण और शहर का कार्यालय अलग अलग हो जाएगा।

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