
बिलासपुर। भाखड़ा बांध के निर्माण से हिमाचल ही नहीं देश के कई इलाके रोशन हुए। लेकिन, इस बांध के लिए अपना घर-वार और सब गंवाने वालों को कुर्बानी का अच्छा सिला मिला। औरों को रोशन करने वालाें को इनाम मिला तो सिर्फ अंधेरा। खुद बिलासपुर अंधेरे में है। उमस भरी गर्मी झेल रहे बिलासपुर के लोग अब अंधेरे से जूझ रहे हैं।
बिजली बोर्ड का लगभग 1.31 करोड़ का बिल भरना नगर परिषद बिलासपुर के लिए किसी चुनौती है। नप के हाथ खाली हैं। बजटका बड़ा हिस्सा कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर खर्चा हो रहा है। आय के सीमित साधन होने के कारण बिजली बिल की अदायगी तो दूर लोगों को मूलभूत सुविधाएं जुटाना भी नप के लिए चुनौत है। नगर परिषद बिल की रकम के लिए सरकारी ग्रांट के इंतजार में है। सीएम को पाती भेज पहले ही बीबीएमबी से मिलने वाले 4225 करोड़ में बिलासपुर को हिस्सा मांगा है। नगर परिषद ने मुफ्त बिजली की भी मांग भी की है। नगर परिषद अध्यक्षा रजनी शर्मा ने कहा कि जनवरी से बिल लगातार भरा जा रहा है। कनेक्शन कटने से स्थानीय जनता परेशान हुई है। आज आधा देश बिजली से जो जगमगा रहा है, वह बिलासपुर वासियोें की कुर्बानी से संभव हो पाया है। आज वही शहर अंधेरे में है। इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है। होना तो यह चाहिए कि इस कुर्बानी की एवज में बिजली और पानी मुफ्त दिया जाए। इस बारे 21 जून को उपाध्यक्ष एवं अन्य पार्षदों ने उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री को प्रस्ताव भी भेजा है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मांग की जाती है कि जन सुविधा को देखते हुए स्ट्रीट लाइटें बहाल करवाई जाए। बिजली बोर्ड के अधिशासी अभियंता ओपी चंदेल का कहना है कि कनेक्शन न्यायालय के आदेश पर काटा है। अब न्यायालय के आदेश मिलने या बिल जमा होने की सूरत में ही बिजली बहाल होगी।
