
लखनऊ: उत्तरप्रदेश भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) ने आरोप लगाया है कि अखिलेश यादव सरकार राज्य में साम्प्रदायिकता का जहर घोल रही है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि राज्य में सांप्रदायिकता को बढ़ावा दे रही अखिलेश सरकार मुस्लिम तुष्टिकरण की अंधी दौड़ में सरपट दौड़ रही है। अब निकायों में मुसलमान कर्मचारियों की गिनती और तैनाती। मुस्लिम तुष्टिकरण की दिशा में उठाया गया एक और कदम है पाठक ने कहा कि नौकरी योग्यता के आधार पर मिली है मजहब के आधार पर तो नौकरी मिली नहीं। फिर मजहबी आधार पर नौकरी मिलने की न तो कोई व्यवस्था है और न ही संविधान इजाजत देता है।
इसके बावजूद निकायों में मजहब के आधार पर गणना के पीछे सरकार की मंशा क्या है। तुष्टिकरण की पराकाष्ठा में जुटी अखिलेश सरकार थानों में मजहब के नाम पर तैनाती की वकालत करती है। हमारी बेटी उसका कल का नारा देती है पर सहायता केवल अल्पसंख्यक बेटी को मिलती है। क्या हमारी बेटी का मतलब केवल मुस्लिम बेटियां ही हैं।
पाठक ने कहा कि तुष्टिकरण के ये फैसले समाज में विभेद की स्थिति पैदा कर रहे हैं। निकायों में मुस्लिम कर्मियों की गणना तथा उनकी तैनाती का स्थल जानना सरकार की मुस्लिम वोट बैंक की रणनीति का हिस्सा है। अपनी इसी नीति और व्यवहार के चलते प्रदेश का वातावरण दूषित करने में जुटी समाजवादी पार्टी दंगाइयों को संरक्षण देती उनके पक्ष में खड़ी होती नजर आती है। उन्होंने कहा कि अखिलेश सरकार अपना सामान्य कामकाज तो कर नहीं पा रही है लेकिन निकायों में मुस्लिमों की गिनती कराने का फैसला करती है। अल्पसंख्यक कल्याण के लिए आवंटित धन का महज 6.57 प्रतिशत खर्च कर पाने वाली यह सरकार वोट बैंक की लालसा में झूठे दावे और जनता को गुमराह करने वाली कार्यवाही में जुटी है।
उन्होंने कहा कि मजहबी आधार पर आरक्षण की वकालत करने वाले लोग अपनी ही सरकार में जब अल्पसंख्यक छात्रों की फीस प्रतिपूॢत मामले पर सवाल होता है तो निरत्तर हो जाते हैं। पाठक ने कहा कि अल्पसंख्यकों के हित और कल्याण के लिए चलायी जा रही योजनाओं के नाम पर सिर्फ मुस्लिम समुदाय के हितों को ही अहमियत दे रही राज्य सरकार की हर नीति एवं योजना मुस्लिम समुदाय के हितों को ध्यान में रखकर बनायी जा रही है। उन्होंने अखिलेश सरकार से कहा कि वह स्पष्ट करे कि राज्य के निकायों में कार्यरत मुस्लिम की गणना और तैनाती के फैसले के पीछे क्या मंशा है।
