
पैंतीस साल से कम उम्र की विधवा को फिर से एक खुशहाल जीवन देने के लिए सरकार की कल्याणकारी योजना का विभाग ही गला घोंट रहा है। सात सालों में एक भी महिला को विधवा पुनर्विवाह अनुदान नहीं दिया गया है।
समाज कल्याण अधिकारी राम अवतार सिंह का कहना है कि आवेदन आते हैं तो अनुदान दिया जाता है। विभाग के प्रमुख सचिव एस राजू को इस योजना के संबंध में कोई जानकारी नहीं है।
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‘समाज कल्याण विभाग उत्तराखंड द्वारा संचालित योजनाओं का विवरण’ नामक विभाग की पैम्फ लेट में विधवा पुनर्विवाह अनुदान योजना आठवें नंबर पर है। जिला समाज कल्याण अधिकारी राम अवतार सिंह यह दावा कर रहे हैं कि इस योजना के प्रचार-प्रसार के लिए बाकायदा विज्ञापन किया जाता है।
इसके साथ शिविरों में भी लोगों को योजना के संबंध में जानकारी दी जाती है। लेकिन आंकड़ों से इस योजना का हश्र साफ पता चल रहा है।
बारह साल से लागू है योजना
यह योजना बारह साल से लागू है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि विधवा पुनर्विवाह अनुदान योजना के तहत वर्ष 2001 में दो, 02 में तीन, 03 में एक और 2004 में एक महिला को पैसा दिया गया था। कुल मिलाकर अब तक सात महिलाओं को यह अनुदान दिया गया।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सरकार हर साल बजट देती है। विभाग को योजनाओं के प्रचार-प्रसार के संबंध में भी शासन बजट आवंटित करता है। विभागीय अधिकारी योजना के प्रचार प्रसार का दावा भले ही करें लेकिन इसकी जानकारी आम जनता को नहीं है।
इनकी मासूमियत देखिये
समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव एस राजू कहते हैं कि ‘विभाग में तो ऐसी कोई योजना ही नहीं है। इस संबंध में उनके पास कोई बजट भी नहीं है।’
यह है योजना
-18 साल से 35 साल की विधवा से विवाह करने पर दंपति को 11000 रुपये अनुदान दिया जाता है।
-औपचारिकताएं:1-आय प्रमाण पत्र, 2-दो व्यक्ति विधवा से विवाह करता है उसकी दूसरी शादी/जीवित पत्नी न होने का प्रमाण पत्र।
3-विवाह का प्रमाण पत्र तहसीलदार द्वारा प्रदत्त।
एक नजर
-विधवा पेंशन पाने वाली महिलाएं-3 हजार 234
-कुल विधवाओं की संख्या-7 हजार
-18 से 35 साल की विधवाएं-3 हजार
