
देहरादून। केदारघाटी स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर के पुजारी रामदेव गिरि (68) ने सीने पर पत्थर रखकर अपनी गौशाला की सात गायें बेचीं तब दून अस्पताल तक पहुंच पाए। आपदा में वह घायल हो गए थे, उनके सिर पर चोट आई है जिससे शरीर के बाईं तरफ का हिस्सा सुन्न पड़ गया है। प्राइवेट वाहन चालक ने उनसे 17 हजार रुपये किराया लिया।
पुजारी रामदेव गिरि का दून अस्पताल में एक महीने से इलाज चल रहा है। पहले उन्हें वार्ड नंबर 16 के बेड नंबर 17 पर भर्ती किया गया था। अब उन्हें इमरजेंसी के वार्ड नंबर एक में शिफ्ट कर दिया गया है। घटना की याद करके वे रो पड़ते हैं। हाथ जोड़कर कहते हैं कि ‘हे केदारबाबा माफ कर दो।’
गिरि बताते हैं कि वह केदारघाटी में 50 साल से रह रहे थे। कंडारे के पास क्रोंच पर्वत के नीचे उनकी कुटिया थी। यह सौ साल पुरानी है। पहले इसमें पुजारी शारदा गिरि और केशव गिरि रहा करते थे। कहते हैं कि मदद के लिए शासन-प्रशासन कोई नहीं पहुंचा। लोग अपनी कोशिशों से बचे हैं। गिरि कहते हैं कि पचास सालों में पहली बार उन्होंने ऐसी आपदा देखी है।
