
मंडी। बरसात के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों में सांप के डसने से होने वाली मौतों का आंकड़ा हर साल बढ़ता जा रहा है। वहीं पर 108 एंबुलेंस सेवा सर्प दंश के इलाज में वरदान साबित हो रही है। प्रदेश के निचले इलाकों में सर्प दंश के मामले जनजातीय क्षेत्रों की अपेक्षा कहीं अधिक हैं। 108 आपातकालीन सेवा के संचालक भूपेंद्र कुमार का कहना है कि भारत दुनिया के उन देशों के ग्रुप में आता है, जहां हर वर्ष 2.5 लाख से भी ज्यादा मामले सर्प दंश के होते हैं। जिनमें से 50 हजार पीड़ितों की मौत हो जाती है। लेकिन, सांप के डसने के 2-3 घंटों के अंदर एंटी वैनम का इंजेक्शन लग जाए तो रोगी की जान बच सकती है। हिमाचल प्रदेश में भी सर्प दंश के मामले कम नहीं है। वर्ष 2011 में 108 आपातकालीन सेवा के माध्यम से 473 मामले सर्प दंश के निपटाए गए। उसी प्रकार वर्ष 2012 में 482 मामलों में से 127 कांगड़ा और मंडी में 28 रोगी बचाए गए। भूपेंद्र कुमार ने बताया कि सांप के डसने पर किसी तरह की झाड़ फूंक करने के बजाय 108 को फोन करें। इसके अलावा पीड़ित की हिम्मत बंधाएं, उसे सोने न दें, ज्यादा हिलाएं-डुलाएं नहीं, रक्त बहाव को रोके नहीं, पीड़ित को शांत रखें, तनाव से रक्तचाप बढ़ने का खतरा रहता है। डसने वाले सांप को मारने की कोशिश न करें। पीड़ित को खाने पीने को कुछ न दें।
