सस्ते राशन के लिए 17 किमी का सफर

रामपुर बुशहर। एक ओर जहां सरकार लोगों के लिए कई योजनाएं शुरू कर रही है। वहीं, कई क्षेत्रों के लोगों को इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा ही एक उदाहरण निरमंड विकास खंड की तुनन पंचायत का है। इस पंचायत के 9 गांवों के लोगों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिल रहा राशन लेने के लिए 17 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ रहा है। इस कारण लोगों राशन के मूल्य के बराबर ही भाड़ा देना पड़ रहा है।
तुनन पंचायत के गांव गांवबील, गुंडी बिशलाई, तुनन, डुंगा, कांडलू, दामण, पिपटी सेर और क्षैल के लोगों को लगभग 17 किलोमीटर का सफर तय कर राशन लेने के लिए जगातखाना आना पड़ता है। हालांकि पंचायत की अधिकतर आबादी इन्हीं गांवों में बसती है। वर्तमान समय में पंचायत के कुल 667 कार्डधारक जगातखाना राशन डिपो से खाद्य सामग्री लेते हैं। इनमें एपीएल परिवार के 326 परिवार, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत 100 परिवार, बीपीएल के 110 परिवार और एनएफएस के तहत 131 परिवार राशन डिपो से खाद्य सामग्री खरीद रहे हैं। हालांकि कुछ समय पूर्व तुनन गांव में राशन डिपो स्थापित किया गया था, लेकिन वह भी जल्द ही बंद हो गया। ऐसे में यदि किसी ग्रामीण को आटे का कट्टा जगातखाना से तुनन या आसपास के गांव में ले जाना पड़े तो उसे 300 रुपये का भाड़ा चुकाकर कट्टा ले जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों में तिलक राज, सेवा राम, दौलत राम, बुद्धि देवी, जय सिंह, बुद्ध राम और हरदयाल का कहना है कि महंगाई के दौर में उन्हें अपने राशन को घर पहुंचाने में खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जबकि कोई भी सस्ते भाड़े में सामान नहीं उठाता, जिस कारण मजबूरन अधिक दाम चुका कर राशन घर ले जाना पड़ रहा है। लोगों ने फिर से तुनन गांव में राशन डिपो खोलने करने की मांग की है।
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क्या कहना है पंचायत प्रतिनिधियों का
इस बारे में तुनन पंचायत के उपप्रधान परस राम का कहना है कि राशन डिपो तुनन में ही स्थापित किया जाना था, लेकिन सड़क सुविधा न होने के कारण यहां राशन पहुंचाने में परेशानी हो रही है। उन्होंने बताया कि जल्द ही ग्रामीणों की समस्या को दूर करने की कोशिश की जाएगी और उपरोक्त गांव के नजदीक ही राशन का वितरण किया जाएगा।
क्या कहते हैं डिपोधारक
डिपो होल्डर अमृत लाल का कहना है कि पहले राशन तुनन गांव में दिया जाता था, लेकिन सड़क मार्ग न होने की वजह से राशन खच्चरों पर ढोकर ले जाना पड़ता था, लेकिन खच्चर रास्ते की भी दशा सही न होने के कारण जगातखाना में राशन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों से विचार विमर्श कर उनकी समस्या को दूर करने का प्रयास किया जाएगा।

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