
ज्यूरी (शिमला)। पहले अपनों ने दुतकारा अब सरकारी उपेक्षा अनाथ जीवन को पीड़ा दे रही है। कुछ ऐसा ही हाल है रामपुर उपमंडल के सराहन स्थित बाल आश्रम में। यहां 51 अनाथ बच्चों को सर्दी के मौसम में नहाने के लिए गर्म पानी तक नसीब नहीं हो रहा है। रही सही कसर पेयजल आपूर्ति ने पूरी कर दी है। पानी के लिए लगाए गए लोहे के टैंक गली-सड़े हालत में हैं। पानी गर्म करने के लिए लगाया गया सौर ऊर्जा का सोलर सिस्टम भी टूटा पड़ा है। इसके चलते पानी गर्म नहीं हो पा रहा है।
मजबूरी में बच्चों को सर्दी के मौसम में भी ठंडे पानी से नहाना पड़ रहा है। यह तो भला हो उन दानी लोगों का जो अपनों की याद में समय-समय पर आकर इन अनाथ बच्चों को जरूरत की वस्तुएं भेंट कर जाते हैं। इन बच्चों की देखभाल के लिए सरकारी स्तर पर हो रहे प्रयास मात्र खानापूर्ति के अलावा कुछ नहीं हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग अनाथ बच्चों के लिए क्या कर रहा है?
सरकार की ओर से रामपुर उपमंडल के सराहन में अनाथ बच्चों के संरक्षण के लिए अनाथ आश्रम चलाया जा रहा है। इसमें प्रदेश भर के 51 बच्चे रह रहे हैं। इसमें मंडी से 05, चंबा से 25, शिमला से 07, किन्नौर से 05, कुल्लू से 07, सिरमौर से 01 और एक नेपाली बच्चा शामिल है। आश्रम में 1988 और 2003 में सोलर सिस्टम लगाया गया था। जो अब खराब चल रहे हैं। पानी के टैंक इससे पहले के लगाए गए जो अब सड़ चुके हैं। इससे यहां रह रहे अनाथ बच्चों को परेशानियों से दो चार होना पड़ रहा है।
‘पानी के टैंक का प्रारूप तैयार कर आईपीएच विभाग को दिया गया है। सोलर सिस्टम के बारे में हिम ऊर्जा को सूचना दे दी गई है।’ – बीएल चौहान, सीडीपीओ, रामपुर
