सर्किट कोर्ट से पहले दी जाएं सुविधाएं

मंडी। हाईकोर्ट द्वारा उपमंडल स्तर पर सर्किट कोर्ट खोलने से न्याय व्यवस्था का विकेंद्रीकरण होगा। इसका समर्थन जिला मुख्यालय के वकील भी कर रहे हैं लेकिन इस व्यवस्था को लागू करने से पूर्व उपमंडलों में सर्किट बैंच लेकर स्थाई व्यवस्था करने के साथ विकासात्मक ढांचा उपलब्ध करवाया जाए। बुधवार को मंडी जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सात जिलों की संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष भारत भूषण शर्मा ने पत्रकारों से बात करते हुए यह बात कही। उन्होंने इस फैसले से प्रदेश भर का विधिक समुदाय परेशानी में पड़ गया है। बार एसोसिएशन यह स्पष्ट करना चाहती है कि हम विकेंद्रीकरण के खिलाफ नहीं हैं और इस नीति का संघर्ष समिति स्वागत करती है। लेकिन जब तक उपमंडलों में बैंच के लिए स्थाई व्यवस्था नहीं की जाती तब तक इसे लागू न किया जाए।
उन्होंने कहा कि इस संबंध में वीरवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश के माध्यम से हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन भेजा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर उपमंडल स्तर पर सर्किट बैठाया जा रहा है तो लोगों की सुविधा के लिए उसी तर्ज पर हाईकोर्ट का बैंच मंडी और धर्मशाला में भी होना चाहिए। उपमंडलों में न तो जजों के बैठने की व्यवस्था है और न ही लाइब्रेरी है। लिहाजा यह निर्णय जल्दबाजी में और बार एसोसिएशन को विश्वास में लिए बगैर लिया है। करीब 2000 केस की फाइलें जिला से उपमंडलों को वापस भेज दी हैं। लोगों को न्याय हासिल करना अब और अधिक महंगा हो गया है। उच्च न्यायालय ने उपमंडलों में सर्किट कोर्ट का फैसले लेते समय आर्थिक पहलू को ध्यान में नहीं रखा। कहा कि जितना खर्चा सर्किट कोर्ट लगाने में होगा उससे अच्छा तो यह होता कि उपमंडलों में स्थाई कोर्ट की स्थापना की जाती।
एसोसिएशन के महासचिव लोकेंद्र कुटलैहड़िया ने सदस्यों से आह्वान किया कि जब तक स्थाई समाधान नहीं निकाला जाता तब तक विरोध जारी रखा जाएगा। सर्किट कोर्ट का निर्णय न्यायाधीशों, कोर्ट के स्टाफ, अधिवक्ताओं और याचिकाकर्ताओं सभी के लिए परेशानी भरा साबित होगा। इस मौके पर एसोसिएशन के उपप्रधान दिनेश सकलानी, सहसचिव विक्रांत शर्मा सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

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