
शिमला। हिमाचल सरकार ने पूर्व डीजीपी आईडी भंडारी के पेेेेंशन लाभ रोक दिए हैं। गृह और कार्मिक विभाग की ओर से इस बारे में महालेखाकार कार्यालय को गए पत्र में इन्हें केवल प्रोविजनल पेंशन देने को कहा गया है। माना जा रहा है कि जब तक इनका लंबित केस पूरा नहीं होता, इन्हें अन्य पेंशन लाभ नहीं मिलेंगे।
1982 बैच के ये आईपीएस अधिकारी 30 अप्रैल को डीजी होमगार्ड के पद से रिटायर हुए थे। वह पूर्व भाजपा सरकार के समय डीजीपी थे, लेकिन फोन टैपिंग केस में उनका नाम आने और सरकार से टकराव बढ़ने के बाद इन्हें इस पद से हटा दिया गया था। इन आरोपों को लेकर विजिलेंस में जांच चल रही है। इस मामले में विजिलेंस थाने में एफआईआर दर्ज है। लेकिन इसमें किसी को नामजद नहीं किया गया है। उन्होंने फिलहाल सरकार ने वीरभद्र सिंह के टेबल बगिंग केस में चार्जशीट किया हुआ है। उन पर आरोप है कि उन्होंने डा. मन्हास के डीजीपी रहते हुए उनके कहने पर सीआईडी प्रमुख होने के नाते वीरभद्र सिंह के जासूसी की। इस बारे में हालांकि अभी भंडारी ने सरकार को जवाब देना है।
