
बिलासपुर। सरकारी स्कूलों में मिड-डे-मील योजना के तहत बनने वाले भोजन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इसके पीछे कारण डायरेक्ट बेनीफिट योजना (डीबीटी) के तहत गैस सिलेंडर लेने के लिए कोई भी ठोस नीति नहीं बनना माना जा रहा है। अभी तक तो मिडे-मील योजना के तहत स्कूलों में सुचारु रूप से बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था की जा रही है। अभी तक डीबीटी योजना के तहत स्कूलों को मिलने वाले सिलेंडरों पर कोई भी योजना नहीं बनी। प्रदेश में चल रहे स्पोर्ट्स हॉस्टल भी अभी तक इस योजना से बाहर हैं।
डीबीडी योजना शुरू होने के बाद स्कूलों, हॉस्टलों में सब्सिडी पर सिलेंडर मिलेंगे या फिर कमर्शियल दामों पर इस पर कोई भी स्थिति साफ नहीं हो पाई है। इसके लिए भी ठोस नीति बनाने की आवश्यकता है। बिलासपुर, ऊना, हमीरपुर में डीबीटी की शुरूआत कर हो गई है। इसमें गैस सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी सीधे उपभोक्ता के बैंक खाते में जा रही है। सरकारी स्कूल में मिड-डे-मील योजना तथा सरकारी स्पोर्ट्स हॉस्टलों को गैस सिलेंडर किस दाम पर मिलेंगे। इस पर अभी संशय की स्थिति बनी हुई है। आधार से जुड़ने के बाद परिवार को तो ऑनलाइन सब्सिडी मिलेगी। स्कूलों, होस्टलों का क्या होगा।
प्रारंभिक शिक्षा उप निदेशक प्रीतम सिंह ढटवालिया ने कहा कि सरकारी स्कूलों में मिड-डे-मील योजना के तहत गैस सिलेंडरों लेने के लिए अभी तक कोई नीति नहीं बनी हुई है। स्कूलों में मिड-डे-मील के तहत बच्चों को बेहतर भोजना प्रदान किया जा रहा है।
एडीएम बिलासपुर प्रदीप ठाकुर ने कहा कि डीबीटी योजना के तहत सरकारी स्कूल में मिड-डे-मील योजना तथा सरकारी स्पोर्ट्स हॉस्टलों में गैस सिलेंडर मुहैया करवाने को अभी तक कोई भी नीति नहीं बनी हुई है। इसमें सरकार के आदेशों का इंतजार किया जा रहा है।
