
बद्दी (सोलन)। कर्मचारी राज्य बीमा निगम के निदेशक और राज्य चिकित्सा आयुक्त में आपसी तालमेल न होने का खामियाजा बीबीएन के लाखों मजदूरों को भुगतना पड़ रहा है। राज्य चिकित्सा विभाग ने एक माह पूर्व बद्दी के एक चिकित्सालय को विशेष स्वास्थ्य सुविधा देने की मान्यता तो दे दी है, वहीं इस बारे में प्रदेश प्रभारी अनभिज्ञ हैं।
कर्मचारी राज्य बीमा निगम की क्षेत्रीय प्रबंधक को इसकी कोई सूचना न तो अभी तक मजदूर संगठनों को पता है। माडल चिकित्सालय में आग से जलने वाले रोगियों के उपचार की कोई व्यवस्था नहीं है, न ही किडनी के रोगियों को डायलिसिस का कोई प्रावधान है। माडल चिकित्सालय में इन बीमारियों के रोगियों को रेफर किया जाता है। रोगियों को उपचार के लिए तीस किमी दूर पीजीआई जाना पड़ता है। वहीं राज्य आयुक्त ने एक माह से बद्दी के ही एक निजी चिकित्सालय को इन रोगों का उपचार करने के लिए मान्यता दी है। इस सुविधा का प्रचार और प्रसार न होने से अभी भी रोगी पीजीआई के चक्कर काट रहे हैं।
राज्य चिकित्सा आयुक्त डा. अनिता मित्तल ने बताया कि 15 मई को बद्दी के मल्होत्रा चिकित्सालय को बर्न व किडनी के रोगियों को उपचार के लिए मान्यता दे दी है। बद्दी में मल्होत्रा चिकित्सालय की सूची ईएसआई की बेवसाइट पर जारी हो चुकी है। यह सूची निदेशक के पास भी उपलब्ध है।
वहीं प्रदेश प्रभारी एवं निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक बीएस नेगी के अनुसार राज्य आयुक्त की ओर से उन्हें अभी तक बद्दी में किसी निजी चिकित्सालय को उपचार के लिए मान्यता देने की कोई सूचना नहीं दी गई है। सूचना न मिलने से न तो किसी श्रमिक संगठनों को जानकारी दी है न ही सामाजिक सुरक्षा अधिकारियों को इस बारे में प्रचार व प्रसार करने के आदेश दिए हैं।
