
शिमला। भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) ने सरकार से मांग की है कि छह साल पूर्व नियुक्त की गईं 3313 आशा वर्कर्स की तैनाती बिना साक्षात्कार के ही करें। इंटक ने कहा कि इनकी पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में नियुक्ति कर ली गई थी। बाद में भाजपा ने सत्ता में आते ही इन्हें निकाल दिया था। अब इन्हें सीधे तौर पर नियुक्त किया जाएगा। इंटक के राज्य उपाध्यक्ष सोहन वर्मा और सचिव संजय चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के समक्ष आशा वर्कर्स की दोबारा नियुक्ति करने का मामला बार-बार उठाया गया। अब नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जा रही है। सरकार ने निर्णय लिया है कि जिनकी पूर्व में ट्रेनिंग शुरू की जा चुकी थी, ऐसी 531 आशा वर्कर्स की पुनर्नियुक्ति की जा रही है। पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 3313 आशा वर्करज की नियुक्ति की गई थी। इनका चयन ग्राम सभा की संस्तुति पर बीएमओ की अध्यक्षता की कमेटियों ने किया था। इसके बाद सत्ता परिवर्तन हुआ। इसके बाद शिमला, चंबा और लाहौल स्पीति में ही ट्रेनिंग हो पाई थी। बाकी जगहों पर ट्रेनिंग नहीं हुई। ट्रेनिंग वालों को तो कड़ी शर्तों को लगाकर नियुक्त किया जा रहा है, मगर जो 2763 बाकी बचे हैं उनका कुछ नहीं सोचा जा रहा है।
