
मंडी। सीटू से संबंधित परचून फल एवं सब्जी विक्रेता यूनियन सात फरवरी को शिमला में अधिवेशन कर मुख्यमंत्री को मांगपत्र सौंपेगी। यह फैसला यूनियन की बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता सीटू के राज्य उपाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने की। बैठक में चंबा, कांगड़ा, मंडी, कुल्लू, हमीरपुर, बिलासपुर और शिमला जिले के सब्जी विक्रेताओं ने शिरकत की। बैठक में फल एवं सब्जी विक्रेताओं ने कहा कि प्रदेश सरकार फल एवं सब्जियों के रेट निर्धारण बारे दो महीनों से अलग-अलग जिलों में फैसला ले रही है। यूनियन की मांग है कि पूरे प्रदेश में फल और सब्जियों के रेट निर्धारण बारे एक पॉलिसी बनाई जाए। इसके तहत 25 प्रतिशत लाभांश के अतिरिक्त 35 प्रतिशत खर्चा अन्य मुद्दों पर तय होना चाहिए। इसमें मार्केट फीस और थोक मार्केट की कमीशन से परचून की दुकान तक लाने का भाड़ा और मजदूरी तथा लिफाफे, कैरी बैग देने के अतिरिक्त सब्जियों और फलों के गलने सड़ने तथा वजन में हर रोज होने वाली कमी के लिए न्यूनतम 35 प्रतिशत अतिरिक्त खर्चा शामिल होना चाहिए। मंडी जिले के करसोग, सरकाघाट और जोगिंद्रनगर आदि क्षेत्रों में सब्जी मंडियां नहीं हैं। इस कारण उन्हें मंडी, नेरचौक और सुंदरनगर से माल लाना पड़ता है। इसका भाड़ा ज्यादा होता है।
शिमला में होने वाले अधिवेशन के बाद सरकार को दिए जाने वाले ज्ञापन में रेहड़ी-फहड़ी वालों के लिए बने स्ट्रीट वैंडर्स एक्ट-2013 को प्रदेश में लागू करने की भी मांग की जाएगी। प्रत्येक नगर परिषद और पंचायत क्षेत्र में रेहड़ी-फहड़ी वालों का सर्वेक्षण करके उनका पंजीकरण होगा। उन्हें पहचानपत्र और टोकन नंबर जारी होंगे। कारोबार करने के लिए स्थान आवंटित किए जाएंगे। इसके अलावा प्रदेश में टाउन वेंडिंग कमेटियां गठित करने की मांग की जाएगी। बैठक में राज्य स्तरीय कमेटी का गठन कर मंडी जिले से प्रधान सुरेंद्र कुमार को संयोजक और शिमला के सुरेंद्र्र बिट्टू को सह संयोजक बनाया गया। देशराज राणा, किशोरी लाल डढवालिया, ठाकुर दास, विजय कुमार, तिलकराज, टेक सिंह और रिझू राम सदस्य नियुक्त किए गए।
